सुचना: प्रिय मैथिल बंधूगन, किछ मैथिल बंधू द्वारा सोसिअल नेटवर्क (फेसबुक) पर एक चर्चा उठाओल गेल " यो मैथिल बंधूगन कहिया ई दहेजक महा जालसँ मिथिला मुक्त हेत ?" जकरा मैथिल बंधुगणक बहुत प्रतिसाद मिलल! तहीं सँ प्रेरीत भs कs आय इ जालवृतक निर्माण कएल गेल अछि! सभ मैथिल बंधू सँ अनुरोध अछि, जे इ जालवृत में जोर - शोर सँ भागली, आ सभ मिल सपथ ली जे बिना इ प्रथा के भगेना हम सभ दम नै लेब! जय मैथिली, जय मिथिला,जय मिथिलांचल!
नोट: यो मैथिल बंधुगन आओ सभ मिल एहि मंच पर चर्चा करी जे इ महाजाल सँ मिथिला कोना मुक्त हेत! जागु मैथिल जागु.. अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर प्रकट करू! संगे हम सभ मैथिल नवयुवक आ नवयुवती सँ अनुरोध करब, जे अहि सबहक प्रयास एहि आन्दोलन के सफलता प्रदान करत! ताहीं लेल अपने सभ सबसँ आगा आओ आ अपन - अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर राखू....

शनिवार, 28 जनवरी 2012


गजल @प्रभात राय भट्ट

       गजल
हम अहां केर  प्रीतम नहि बनी सक्लहूँ
मुदा अहांक करेजक दर्द बनी गेलहुं

अहां हमर प्रेम दीवानी बनल रहलौं
हम अहांक दीवाना नहि बनी सक्लहूँ

अहां हमर प्रेम उपासना करैत गेलौं
हम आनक वासना शिकार बनी गेलहुं 

अहांक कोमल ह्रदय तडपैत रहल
हम बज्र पाथर केर मूर्ति बनी गेलहुं 

हम अहांक निश्च्छल प्रेम जनि नै सकलौं
अनजान में हम द्गावाज बनी गेलहुं 

आब धारक दू किनार कोना मिलत प्रिये
मजधार में हम नदारत बनी गेलहुं
................वर्ण:-१६ ...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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बुधवार, 25 जनवरी 2012


गजल@प्रभात राय भट्ट

                    गजल
आई हमर मोन एतेक उदास किये
सागर पास रहितों मोनमें प्यास किये

निस्वार्थ प्रेम  ह्रिदयस्पर्श केलहुं नहि
आई मोनमे बहै बयार बतास किये   

हम प्रगाढ़ प्रेमक प्राग लेलहुं नहि 
आई प्रीतम मोन एतेक हतास किये  

प्रेम  स्नेह  सागर  हम  नहेलहूँ नहि 
आई प्रेम मिलन ले मोन उदास किये   

हम मधुर मुस्कान संग हंस्लहूँ नहि   
आई दिवास्वपन एतेक मिठास किये  

"प्रभात" संग पूनम आएत आस किये  
नहि आओत सोचिक मोन उदास किये  
.................वर्ण-१५............................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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रविवार, 22 जनवरी 2012

नोर झहरि रहल छल।




नोर झहरि रहल छल।

बहिन उठि नैहर सँ सासुर बिदा भेलीह
बपहारि काटि कानि रहल छलीह
हमहू बाप बाप कानि रहल छलहुँ
आखि सँ टप टप नोर झहरि रहल छल।

माए गे माए भैया औ भैया
एसगर हम आब जा रहल छी
भरदुतिया मे आएब अहाँ
एतबाक आस लगेने हम जा रहल छी।

छूटल नैहर केर सखी बहिनपा
आब मोन पड़त सब साँझ भिंसरबा
छूटल बाबू केर दुअरिया
डोली उठा ल चल हो कहरबा।

जाउ जाउ बहिन जाउ अहाँ अपना गाम
भरदुतिया मे आएब हम अहाँक गाम
माए हमर पुरी पका कए देतीह
हम नेने आएब चिनीया बदाम ।

जुनि कानू बहिन पोछू आखिक नोर
आब सासुर भेल अहाँक अप्पन गाम
सास ससुर केर सेबा करब
व्यर्थ समय गमा नहि करब अराम।

जेहने अप्पन माए बाप
तेहने सास ससुर
नहि करब कहियो झग्गर दन
लोक लाज केर राखब धियान।

भैया यौ भैया अहाँ ठीके कहैत छी
नहि करब हम केकरो स झगरदन
सभ सँ मिली जुलि के हम रहब
गृहलक्ष्मीक दायित्व केर करब निरवहन।

मुदा कोना क कहू औ भैया
छूटल नैहर बिदा भेल छी सासुर
माए कनैत अछि बाबू के लगलैन बुकोर
टप टप झहरि रहल अछि आखि सँ नोर।

धैरज राखू बहिन जाउ एखन अपना गाम
राखि मे चलि आएब नैहर बाबू केर गाम
हसी खुशी सँ गीत गाएब
सभ सखी मिली समा चकेबा खेलाएब।

सभ के प्रणाम क बहिन बिदा भेलीह
मुदा स्नेह स कानि रहल छलीह
दुनू भाए बहिन कानि रहल छलहु
आखि सँ टप टप नोर झहरि रहल छल।



लेखक:- किशन कारीगर

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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

दहेज़ मुक्त मिथिला

दहेज़ मुक्त मिथिला

जागु मैथिल मिथिलावाशी ,
बेटी के करू सम्मान ,
भेदभाव नै बेटा बेटी में दुनु एक सामान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान ...........
दहेजक लेनदेन ब्याब्हार बनल अछि ,
बिबाह ता समाज में ब्यापार बनल अछि
बेटी के दहेज़ नै सिक्छा दिऔ तखने होयत असली कन्यादान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान ......
बेटा जनामिते ख़ुशी के बहार आबिया ,
बेटी जनामिते घर में हाहाकार मचैया
गर्भे में नै ह्त्या करू ,
बेटियों अछि अपने संतान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान .........
दहेजक कारने कते पुतहु जरैया ,
कते बेटी फांसी लगा मरैया
घरक लक्ष्मी बोझ बनल अछि
बेटा के बेचिए में लोग बुझैय अपन शान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान .......
सृस्ती के निर्माणक आधार छित नारी ,
प्रेम , त्याग , शहनशीलता के पहचान छैथ नारी
मिथिला के बेटी के कैर सम्मान ,
बढाबू अपन मिथिला के शान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान ....
रचना:-
करुना झा
बिरठ्नगर

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मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

आयब अपनो सभ सौराठ सभाके काल यौ,
मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

फेरो लगतैय एहिठाम मेला,
बनतैय मिथिला नव-नवेला,
आयब एकबेर एहि पावन भूमि बाबाधाम यौ,
मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

बनतैय वैह सुनर देव-मन्दिर,
फेरो आयत भूदेवक भीड़,
बनतै सुन्दर जोड़ी मिथिलाके महान्‌ यौ,
मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

देखियौ केना डेराइ छै दुर्जन,
लगबैय दोख दहेजक दुश्मन,
लेकिन आब हेतय दहेज मुक्त विवाह यौ,
मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

छलखिन बड़ दूरदर्शी बाबा,
लगौलनि एहिठाम सुनर इ भेला,
होइ कुटमैती देखि-देखी के खनदान यौ,
मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

आइ मिथिला जानि कते पाछू,
दुनिया में सभ बनलैय आगू,
बेटी पर अछि झूठ दहेजक लाद यौ,
मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

आउ मिलि शपथ लियऽ यौ भाइ सभ,
आयब जानि-बूझि एहि भू पर,
बनेबैय स्वच्छ-समृद्ध ओ सुन्दर धाम यौ,
मैथिल विद्वानक गाम यौ ना!

आयब अपनो सभ ....
प्रवीण नारायण चौधरी
 

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