सुचना: प्रिय मैथिल बंधूगन, किछ मैथिल बंधू द्वारा सोसिअल नेटवर्क (फेसबुक) पर एक चर्चा उठाओल गेल " यो मैथिल बंधूगन कहिया ई दहेजक महा जालसँ मिथिला मुक्त हेत ?" जकरा मैथिल बंधुगणक बहुत प्रतिसाद मिलल! तहीं सँ प्रेरीत भs कs आय इ जालवृतक निर्माण कएल गेल अछि! सभ मैथिल बंधू सँ अनुरोध अछि, जे इ जालवृत में जोर - शोर सँ भागली, आ सभ मिल सपथ ली जे बिना इ प्रथा के भगेना हम सभ दम नै लेब! जय मैथिली, जय मिथिला,जय मिथिलांचल!
नोट: यो मैथिल बंधुगन आओ सभ मिल एहि मंच पर चर्चा करी जे इ महाजाल सँ मिथिला कोना मुक्त हेत! जागु मैथिल जागु.. अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर प्रकट करू! संगे हम सभ मैथिल नवयुवक आ नवयुवती सँ अनुरोध करब, जे अहि सबहक प्रयास एहि आन्दोलन के सफलता प्रदान करत! ताहीं लेल अपने सभ सबसँ आगा आओ आ अपन - अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर राखू....
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शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

एक पत्र मिथिलाके विद्वान्‌के नाम



आदरणीय शिवनाथ सर,------

        बहुत प्रसन्नता भेटल अपनेक फेशबुक पड़का प्रोफाइल देखि के!! अपनेक पुस्तक के माध्यम से आन्दोलनके बात पढला सऽ आरो जिज्ञासा जागल कि देखी एहेन महान्‌ शख्स जिनक आत्मविश्वास एतेक सार्थक कि पुस्तक सऽ आन्दोलन के बात करैत छथि... माँ सरस्वतीके कृपा अपने ऊपर बनल रहैन आ अपने अपन सोच आ अन्दाज दुनूमें कामयाब होइ इ प्रार्थना।
संगहि, हमरा लोकनि किछु युवा हालहि किछु मास पहिने सँ फेशबुकके पेजपर सऽ एक अति प्राचिन परंपरा जे आइ-काल्हि एकदम वीभत्स रूपमें मिथिला समाजके दीमक जेकां चटने जा रहल छैक - मिथिलामें सेहो आब सीताके जन्म लेबय सऽ पहिने ओहि धरामें दबाओल जा रहल छैक जेकर प्रभाव सऽ जनसंख्या २०११ प्रमाण स्वरूप कहि रहल अछि जे स्त्रीके संख्यामें घटाव भऽ रहल अछि। एकर प्रभाव एतबी हमरा अहाँ पर हावी अछि जे लोक अपन बेटीके पढाबैक इच्छा रखितो ओकर पढाई पर खर्च कम आ ओकरा नामके बैंक बैलेन्स बेसी बनाबैत छथि जाहि सँ विवाह कोनो नीक घरमें कराओल जा सकैक...! कतेक अनैतिक बात छैक - देखू, किछु गार्जियन बेटा आ बेटीमें कोनो फर्क बिना केने नीक सऽ नीक खर्च करैत बेटीके सेहो उच्चाधिकारी तक बनाबैत छथि, मुदा आब हिनक बेटीके लायक एक तऽ लड़का के कमी, दोसर जे यदि कोनो लड़का उच्चाधिकारी लड़की लायक भेटबो केलखिन तऽ आब ओहि त्यागी बापके लेल जे केओ जमाय बनथिन ओ व्यवस्थामें कतेक दहेज गनबेथिन आ ओ व्यवस्थाके कतय सऽ ओ बाप चुकेथिन... :(... तखन आब कि हेतैक... मजबूरीमें ओ उच्च शिक्षित बेटी अपन चुनाव स्वयं करती आ मिथिलाके बाहरो के लड़का बेसी संभव चुनि सकैत छथि जे पुनः मिथिलाके गरिमा के लेल एक चुनौती ठाड़्ह करत। हलांकि सीताजी सेहो राम संग वरण केलीह, लेकिन आबके सीता कतय ठहरती, मिथिलाके सम्मान सीताजी तऽ एहेन बना देलीह जे हमरा लोकनि गर्व करैत छी कि हुनकहि धरतीपर जन्म भेल... मुदा आजुक सीता तऽ शहर के मुँह देखिते देरी मैथिली तक बिसरि जैत छथि... कतेक दुःखद स्थिति छैक सर? सर! हमरा लोकनि आब केवल पुरनका सम्मानके भजा रहल छी, नव में हमर सभके अबस्था एहेन दरिद्री सऽ भरल रहत... कि इ नीक बात? सोची! अपने लोकनि एहि समाज के अग्रगामी निकास देनिहार व्यक्तित्व सभ थिकहुँ। यदि नहि किछु करब तऽ दोषी बनब। सभ संग किनारा कैल जा सकैछ, मुदा अपन आत्माके ज्ञान सदिखन हमरा लोकनिके कोसत।
सर! आब एहेन समय आबि गेलैक जे अपने लोकनि मिथिलाके राम मनोहर राय बनि एहि दहेजके दानव जे ताण्डव कय रहल अछि एकरा भगाउ आ ओ सुन्दर सौराठके परिकल्पना के पुनः जीवित करू। सौराठ एक नहि अनेक होइक आ मैथिल पुनः अपन गरिमाके रक्षार्थ एक बेर क्रान्ति के बिगूल बजाबैथ। हमर आग्रह!
दिल्लीमें एक कार्यक्रम रखने छी, २८ सेप्टेम्बर के! अपने दहेज मुक्त मिथिला नामक ग्रुप पर यदि नहि होइ तऽ आबी आ किछु समय हमरो लोकनिके पथ-प्रदर्शन करी, सेहो आग्रह!
अपनेक शुभेच्छूक,
प्रवीण चौधरी
कार्यकर्ता, दहेज मुक्त मिथिला
हरिः एव हरः!!

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शनिवार, 16 अप्रैल 2011

दहेज मुक्त मिथिला ( स्थानीय सौराठ विकास समिति )

उपस्थित सदस्यगण! श्रेष्ठ, मित्र एवं अनुज!!

हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन!

आजुक मिटिंग निरंतरता में अछि आ आब मैथिलीके मिथिलाक चौरी सऽ निकलि दहेज मुक्त मिथिलाके एहि दलानपर अपने लोकनिक पुनः स्वागत अछि। हमरा लोकनि लगभग हर विन्दुपर चर्चा कयलहुँ आ बहुतो रास बातके निर्णय कयलहुँ। सौभाग्य हमरा लोकनिक जे एहि मिटिंगमें श्री कृपानन्द झा सर के अध्यक्षता भेटल। श्रेष्ठ संरक्षक लोकनिक सान्निध्य भेटल। मुद्दा पर आबी।

१. सौराठ सभा के पुनरुत्थान करब से निर्णय लेल।
२. दहेज मुक्त मिथिला स्थानीय सौराठ विकास समिति एवं अन्य संस्थासभ संग मिलिके सहकार्य करब से निर्णय लेल।
३. दहेज मुक्त मिथिलाके स्वतंत्र संगठन बनायब से निर्णय लेल।
४. दहेज मुक्त विवाह के प्रोत्साहन देब से निर्णय लेल।
५. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय एवं बाहरी सदस्य सभ के जोड़ब से निर्णय भेल। स्थानीय जिम्मेवारी सऽ लऽ के विभिन्न जगहके जिम्मेवारी सदस्य लोकनि सहर्ष स्वीकार कयलाह, जेकर सूची अलग सऽ पेश कयल जायत।
६. सदस्यता शुल्क संरक्षक सदस्य - ५१०१/-, संस्थापक सदस्य - २१०१/-, आजीवन सदस्य ५०१/- एवं साधारण सदस्य १५१/- राखब से निर्णय लेल।
७. सौराठ उपरान्त दहेज मुक्त विवाह समग्र मिथिलावासी हेतु बिना कोनो जाति-पाँति के भेदभाव रखने केवल मैथिली भाषाभाषीके लेल भारत तथा नेपालके विभिन्न स्थानपर सभा-आयोजना करब से निर्णय लेल।
८. सदस्य सभ के-कोना सदस्यता ग्रहण करता से निर्णय लेल, जेकर अलगे लिस्ट बनाओल जायत, सदस्यता शुल्क तत्काल श्री प्रकाश चौधरीजी के खाता संख्या ११३०२५९४५०२ - खाताधारक: प्रकाश चन्द्र चौधरी, बैंक: स्टेट बैंक अफ ईण्डिया, रहिका शाखा में कैल जाय से निर्णय भेल।
९. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय नागरिक सभके सदस्यता अभियान हेतु कार्यकर्ता परिचालन, प्रचार-प्रसार हेतु आवश्यक पहल एवं आगामी २२ मई के सौराठमें सौराठ विकास समिति संग मिटिंग से निर्णय भेल।
१०. सौराठके सफलता हेतु कार्यक्रम २०-२९ जून, २०११ धरि सदस्य सभके सक्रिय योगदान सऽ स्थानीय सौराठ विकास समिति संग सहकार्य करैत सभामें एक शिविर तथा मंच दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सऽ होयत से निर्णय भेल।

एकर अलावे अनेको विन्दुपर सभ आदरणीय सदस्य सभक विचार भेटल आ ताहि विचार के एक बेर फेर सऽ समेटैक लेल इ थ्रेड के निर्माण कयल गेल, आब अपने लोकनि अपन-अपन विचार आ मिटिंगके संस्मरणके नीचां कमेन्टके रूपमें पोस्ट करी से आग्रह करैत फोरम के खोलैत छी।

धन्यवाद! जय मैथिली! जय मिथिला!!

 
परवीन नारायण  चौधरी

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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

सौराठ सभा २०११: प्रस्तावित दहेज मुक्त मिथिला के सहभागिता - प्रवीण चौधर...

प्रथम उद्देश्य: सौराठ सभाके पुनर्जीवित केनै

द्वितीय उद्देश्य: दहेज मुक्त मिथिला के प्रथम लक्ष्य-प्राप्ति हेतु दहेज मुक्त विवाह करनिहार जोड़ा-जोड़ी लेल ग्रास-बास-कपास एवं अन्य सभ आवश्यक सुविधाके जोगाड़ एवं व्यवस्थापना

तृतीय उद्देश्य: वंशावली परंपरा के महत्त्वके बुझैत आजुक ग्लोबल मिथिला में मैथिलकेर वर्तमान अवस्थिति, गणना एवं वंशावली व्यवस्थाके निर्माण - कंप्युटरीकरण

चतुर्थ उद्देश्य: सौराठ सभाके तर्जपर विभिन्न गाम आ शहर में सभा लगैक आ दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सऽ द्वितीय उद्देश्यके निर्वाह

पंचम उद्देश्य: पंजीकार, दुतीकार, आदि सभके लेल पारितोषिक एवं आर्थिक लाभोपार्जन हेतु समुचित अवसरके निर्माण

(आरो महत्त्वपूर्ण विन्दु के रूपमें उद्देश्य जोड़यके लेल अपनेक मूल्यवान्‌ सल्लाह निमंत्रित अछि।)

वर्तमान लक्ष्य: सौराठ सभा २०११ में कम से कम १०० जोड़ा वर एवं कन्याके दहेज मुक्त मिथिलाके प्लेटफार्मके अन्तर्गत दहेज मुक्त विवाह सौराठ सभाके शुभ लग्न में संपन्न करयबाक योजना। संपूर्ण सहभागी जोड़ा हेतु एक-समान पारितोषिक-उपहार भेंट-प्रस्तुति। सभ दहेज मुक्त विवाह ऊपर पूर्ण मिडिया कवरेज। स्मारिका हेतु सभ दहेज मुक्त जोड़ाकेर जीवनपर आधारित रोचक एवं प्रासंगिक लेख-रचना, फोटो, एवं सरकारी सहायता उपलब्ध कराबय हेतु आश्वासन एवं कार्यान्वयन। (एतेक बात एहि बेरक सभामें समावेश कैल जाय, वा अपनेक सल्लाह जोड़य-घटाबय हेतु आग्रह।)

कार्यक्रम योजना: जून २०-२९, २०११ - सौराठ सभामें दहेज मुक्त मिथिलाके एक स्टेज एवं कैम्प जाहिमें कमसे कम २०० आदमीके लेल ठहरनै, भोजन-पानी एवं संपूर्ण आवश्यक मानव-सेवा उपलब्ध करौनाइ - समुचित दर पर वा निःशुल्क - कोष अनुसार निर्णय कैल जायत। सहभागी सभक लेल आवश्यक प्रचार-प्रसार।

केन्द्र: सौराठ सभागाछी वा आसपास कोनो गाममें एक कार्यालयके स्थापना।

कोष: दहेज मुक्त मिथिलाके सदस्य सभक व्यक्तिगत सहयोग - गाम-गाम आ शहर-शहर में चन्दा संकलन (स्वेच्छासहित)। एक बैंक खाता खोलि समग्र दान के समुचित लेखासहित व्यवस्थापना। अन्य।

कार्यकर्ता: ६० प्रतिशत स्थानीय कार्यकर्ता, ४० प्रतिशत बाहरी सदस्य एवं पदाधिकारी।

क्रियान्वयन: उपरोक्त कार्यक्रमके शुभारंभ सौराठ सभा समयमें, तेकर उपरान्त कार्यकारिणीके निर्णयानुसार।

सदस्यता शुल्क: आजीवन ५०१/- एवं वार्षिक: १५१/-

संस्था पंजीकरण: मधुबनी जिलान्तर्गत जिलाधीशके कार्यालय सऽ सल्लाह-मशवरा करैत एकर पंजीकरण नियमानुसार करैत संस्थाके बैंक खाता खोलनाइ - इ कार्य एक-बेर जखन इ ड्राफ्ट पूर्ण रूप लऽ लेत तखन तुरन्त करबाक लेल आग्रह।

हरिः ॐ! हरिः हरः!!

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सौराठ सभाके अभियान में अपनेक राय-मशव - प्रवीण चौधरी

बंधुगण!


सौराठ सभाके अभियान में अपनेक राय-मशवरा माँगैके क्रम में कि देखलहुँ जे अपने लोकनि सौराठके सीमा केवल मैथिल ब्राह्मण तक सीमित नहि राखि एकरा विस्तार करय चाहैत छी। जय हो!! अपने लोकनिक हर मंशा माँ मैथिली पूरा करैथ, से हमर प्रार्थना। चूँकि सभागाछीके महत्त्व तऽ आब ब्राह्मणोके नहि अपील करैछ कारण ओहो सभ एनै छोड़ि देलाह आ पुरखाके कीर्तिपर स्वयं तूफान आ बवंडर आनि देलाह, त एहेन में एहि सभाके मोडेलमें विस्तार कनेक असान्दर्भिक बुझैछ... कम से कम एहि साल वा कहु जे एहि बेरक मुहुर्तमें। ताहि हेतु हम अपने सभके समक्ष एहि दोसर थ्रेडके निर्माण करैत किछु प्रश्न राखि रहल छी जाहिपर अपन मत राखल जाउ।

जय मैथिली! जय मिथिला!!

प्रश्न अछि:

१. कि मैथिल माने खाली मैथिल ब्राह्मण?
२. कि मिथिलामें रहनिहार सभ मैथिल नहि छथि?
३. यदि छथि तऽ एहेन दुष्प्रचार किऐक जे खाली ब्राह्मण टा मैथिल छथि?
४. सौराठ सभा केवल ब्राह्मण हेतु कियैक?
५. कि अन्य वर्ण एहि में अपन हिस्सा नहि चाहलैथ?
६. कि राजा हरसिंह देव जे एहि प्रथाके चलौला, कि ओ ब्राह्मणकेर वर्चस्वके स्वीकार करैत मात्र सौराठ में ब्राह्मण टा के सभा के रूप में स्थापना कयलाह? (सौराठ सनक अनेक एहेन स्थल छैक जतय सभा लगाओल जैत छल, आ ओ सभ सभा केवल ब्राह्मण हेतु छल... हमरा समझ सऽ अन्य जाति के एहि तरहक सभाके औचित्य नहि बुझैत छल - किऐक तऽ जे वैवाहिक विधान ब्राह्मणमें होइछ ततेक तितम्भा अन्य वर्ण में नहि छैक... एखनहु एहि बात के प्रमाण देखय में अबैछ।)
७. मिथिलामें जतय कतौ कोनो समाजिक संरचना के निर्माण भेलैक ताहिमें ब्राह्मणक अग्र भूमिका रहलैक, अन्य जाति केवल अनुसरण करयवाला एवं ब्राह्मणके पाछू चलयवाला रहलैक जेना बुझैछ... तखन पहिले एहेन कोनो विरोध वा विद्रोह नहि भेल छल। जखन कि आब एहि मुद्दापर अनेक तरहक बात उठैछ, एतय तक जे ब्राह्मण जातिके बीच सँ सेहो समावेशीपन के आवाज उठैछ। मिथिलामें रहैत हम आइ धरि इ नहि देखलहुँ जे दलित के नामपर कतहु कोनो प्रकार के विद्रोह वा विरोध आदि भेलैक... छुवाछुत के कारण दलितके बच्चाके स्कूलमें प्रवेश नहि देल गेलैक जे ब्राह्मणके बच्चाके संग ओहो स्कूलमें विद्या अर्जन करत आ से गप ब्राह्मणके मंजूर नहि हेतैक...। हिन्दू-मुसलमान-दलित सभ वर्णके बच्चा एक संग स्कूलमें बोरा बिछा के वा बेन्च-डेस्क प्रयोग करैत बैसल आ भारतीय संविधानके मर्मके रक्षा करैत कम से कम हम अपन जीवनमें देखलियैक आ विश्वास अछि जे एहि तरहक समान नागरिक संहिताके अनुभव अपने लोकनि अवश्य केने होयब। तखन इ पूर्वाग्रही राजनीतिज्ञके वोट बैंक पॅलिसीके शिकार आम जन आ मैथिल किऐक??
८. कर्मकाण्डके कि महत्त्व छैक से बिना आत्मसात केने पुनः वेदके महिमाके झुकाबयवाला विचारके उत्पत्ति किऐक? कि पुनः बुद्धके तोड़ि-मरोड़िके धर्मके नामपर सामाजिक युद्ध के दुस्प्रयास भऽ रहल अछि... जे मिथिला में अनेको बुद्ध-विज्ञ के शास्त्रार्थमें परास्त कयनिहार मिथिलाके अनेको सुप्रसिद्ध विद्वान्‌ भेलाह - हुनकर दूरदृष्टि के मंगनीमें व्यर्थ जाय देबाक चाही? मिथिला अधिकांशतः तांत्रिक भूमि रहल - एकर अपन अनेक अनोखा विद्या रहल, कि ओकरा सभक परित्याग जानि-बूझिके कयल जाय? एक तऽ इ स्वतः गतोष्णमूखी अछि... ताहिपर सऽ मिथिलापुत्र सभ एकरा खीद्दाँश करैत खतम करैक लेल चाहैत छथि, कि इ उचित अछि?
९. हमरा लोकनि जे केओ एहि वाद-विवाद में हिस्सा लऽ रहल छी, अपन श्रेष्ठ के मानैत होयब, हमरा उम्मीद अछि। अपन इतिहास के अवश्य बुझैत होयब हमरा उम्मीद अछि। खाली गप मारब कतेक तक उचित?? यदि गहराई के ज्ञान के कमी अछि, तऽ किऐक नहि हमरा सभके संग देनिहार महान्‌ विद्वान्‌ एवं समाजिक कार्यकर्ता सभके उचित सम्मान दी... आ हुनकहि सऽ एहि विषयपर राय माँगी?
१०. आ कि आब वास्तविक विद्वान्‌ सभके सही में कमी भऽ गेल??

एखन उपरोक्त १० प्रश्न के जबाबके इन्तजार में छी... वार्ता जेना-जेना आगू बढत... तेना-तेना आरो अनेक प्रश्न उठत, से हम सभ पूछब आ अपन राय-विचार सेहो देब। जिनकर नाम हम लेने छी, हुनका सँ विशेष आग्रह जे आब पाछू टा नहि हटब एहि बहस सऽ। अपन समुचित जबाब आ नियंत्रित विचार अवश्य राखब।

जय मैथिली! जय मिथिला!!

अपने लोकनिक सेवा में,

प्रवीण चौधरी ‘किशोर’

ईश्वरके स्मरण करैत:

अपन जीवनक सभ अपनहि मालिक, नीक बेजायके राखय ज्ञान!!
छथि भगवान्‌ सभक लेल हरदम, अपनहि नहि माँगथि सम्मान!!

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बुधवार, 6 अप्रैल 2011

सौराठ सभा २०११ - प्रवीण चौधरी

अबै जाउ! अबै जाउ! अबै जाउ!!


दहेज मुक्त मिथिला के एहि ग्रुपके सक्रिय सदस्य सभके अगुवाई में एहि बेरक सौराठ सभामें पूर्ण जोश सँ सहभागी बनय लेल अबै जाउ। कार्यक्रम के विस्तृत प्रारूप आ सहभागिता हेतु विभिन्न तौर तरीका हेतु हम अपने लोकनि सँ आगामी शनि दिन योजना प्रस्तुत करब। ओ ड्राफ्टके रूपमें होयत। तदोपरान्त अपने लोकनि लग आगामी सात दिन ताहिपर विचार-विमर्श करबाक लेल समय भेटत। आ अगिला शनि दिन पूर्ण रूपमें तैयार ओहि योजना पर अमल करनिहार सभके नाम, गाम, ठेगाना, इच्छा, रुचि, जोड़ी के प्रकृति, आदि अनेक सम्बन्धित बात सभ सेहो प्रकाशित करि हमरा लोकनि एहि बेरका सौराठ सभामें हिस्सा लेब आ एहि महत्त्वपूर्ण परम्पराके निर्वाह के संग सामूहिक शपथ ग्रहण करब जे हमरा लोकनि मिथिलाके दहेज सऽ मुक्त करैक लेल कटिबद्ध छी। जे केओ अपन विवाह ओहि प्लेटफार्म पर घोषणा करता ओ दहेज मुक्तके नायक एवं नायिका के रूप में संसार भरिमें नहि सिर्फ ख्याति पेता बल्कि माँ मैथिली के आशीर्वाद सँ हुनकर कोनो समस्या हमरा लोकनिक समस्या होयत आ हुनकर जीवन धरि हमरा लोकनिक संस्था संरक्षक के रूपमें रहत। हमरा लोकनिक एहि संस्थाके चलाबय हेतु जे कोनो कोष के जरुरी हेतैक ओ व्यक्तिगत वा समूहगत योगदान सहित सरकारी, गैर-सरकारी, चैरिटी शो सऽ कमाई आदि अनेको रहत।



अपने लोकनिक सलाह आमन्त्रित अछि।


जय मैथिली! जय मिथिला!

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