सोमवार, 19 सितंबर 2011
मंगलवार, 5 जुलाई 2011
दिल्ली चलू! दिल्ली चलू!!
स्थान के निर्धारण अबैवाला समयमें - जुलाई के आखिरी तक करब।
कार्यक्रमके प्रारूप:
१. मिथिला झांकी प्रदर्शनी - नगर परिक्रमा संग शुरु करैत मैथिली वा मिथिला संग जुड़ल दिल्लीमें जे कोनो प्रतीकात्मक चिह्न अछि ताहि ठाम वा एक विद्यापति के मूर्ति अनावरण करैक योजना ऊपर सेहो निर्णय करैत हुनकहि प्रतिमाके माल्यार्पण करैत कार्यक्रमके उद्घोष-उद्घाटन करब। चूँकि दिल्लीमें विद्यापतिक एहेन कोनो प्रतिमा पहिले सँ स्थापित अछि वा नहि से हमरा जानकारी नहि अछि, ताहिलेल अपने लोकनि जे दिल्ली सँ छी से एहि विन्दुपर मन्थन करैत निर्णय करी से आग्रह।
२. मिथिला खानपान स्टॅल के उद्घाटन जाहिठाम मिथिलाके विशिष्ट परिकार - व्यञ्जन आदिके खूबसूरत प्रदर्शनी संग सहभागी समस्त मिथिलावासीके लेल एक विशेष उत्सवके अवसर। एहिलेल खानपान सामग्रीके प्रबन्ध सेहो कोनो मैथिल द्वारा होइक चाही। एहेन स्टॅलमें आयोजक द्वारा न्यूनतम सामग्री प्रायोजित होइक आ तेकर बाद व्यवसायिक दृष्टिकोण सँ सहभागिताके संभावित संख्याके अनुसार निजी व्यवसायीके ठेका देल जाय।
३. बाल-बालिकाके कला प्रस्तुति - बाल्य नाटक, नृत्य, चित्रकला (मिथिला पेन्टिंग), मिथिलालिपि लिखनिहार बच्चाके प्रोत्साहन आ एहेन अनेक विन्दु जे केवल आ केवल बच्चा सभमें मैथिलीप्रति झुकावके बरकरार राखैक।
४. विचार गोष्ठी - विद्वान् विचारक, समाज सेवी, नेतृत्वकर्ता, मिथिला आइकान, प्रवासी मिथिलावासी एवं अन्य के समूचा भारत-नेपाल एवं संभव होय तऽ अन्य देश सँ सेहो सहभागी बनबैत दहेज एवं किछु अन्य महत्त्वपूर्ण मुद्दा जाहिमें मिथिलामें पर्यटनके विकास - मिथिलावासी स्वयं नव-मिथिलाके निर्माणकर्ता आदि राखल जाय।
५. सांस्कृतिक कार्यक्रम - नृत्य, संगीत, नाटक, आदि। समूचा दिल्लीके कलाकार जे मैथिली संग जुड़ल छथि आ तदोपरान्त आवश्यकता अनुसार बाहर सऽ कलाकार के सहभागिता कराओल जाय।
६. दिल्ली सम्मेलनके सारांश - दिल्ली उद्घोषणा पत्र के प्रकाशन आ कार्यक्रम समापन।
उपरोक्त प्रारूप ऊपर अपन टिप्पणी आ सुधारके लेल सुझाव लेल प्रार्थना।
प्रार्थी - प्रवीण
मिथिला दहेज मुक्त कोना होयत ?
सामान्यतया घरमें जखन बेटी १८ वर्षके उम्र सँ गुजरि जैछ वा ताहू सऽ बेसी (यदा-कदा कमो...) होवय लगैछ तऽ एक अत्यन्त यथार्थ सोच सभके मस्तिष्क में आबय लगैछ जे आब बेटीके लेल योग्य घर ओ वरके चुनाव करैत कन्यादान करबाक अछि। तहु सऽ पहिने घरमें बेटीके माय बेटीके पिताके खखोरय लगैत छथिन जे हे आबो यदि कतहु बुच्चीलेल सुयोग्...य वरके नहि खोजब तऽ कहिया खोजब... आ एहि प्रकारें शुरु होइछ तकैया। कुटुम्ब आ सम्बन्धीके संग होवय लगैछ वार्तालाप जे कनेक बुचिया लेल कोनो घर-वर देखबैक। ताही क्रममें कोनो योग्य घर-वरके सुझाव आदि सेहो भेटैछ आ चलय लगैछ माथा-पच्ची।
एक बात करू अहाँ गौर यदि,
घरके छथि बनल बोझ बेटी??
प्रकृतिके विडंबना नहि तऽ कि,
पराया घरके लेल बनली बेटी!! :(
खैर - विडंबना सही, लेकिन भार अवश्य बेटी बनैछ अपन जन्म देनिहारि माय-बाप-परिजन पर - अन्य भार नहियो तऽ एतबी जे कोन घर-वर भेटत हिनका लेल। केना के व्यवस्था गानब, केना कि हेतैक, कतेक खर्च करब, केहेन लड़का चाही, अनेको प्रश्न उठैछ हिनक मस्तिष्क में। उद्वेलित हृदय माय-बाप के लेल कोन सहायता बेटी कय सकैत छथि आखिर? ओहो कसमकस में अपन जीवन संगीके लेल सपना देखैत गुमशुम अपन माय-बाप-परिजनके हुनका सदाके लेल पराया बनबैक योजना बनबैत कखनहु नुका के तऽ कखन देवालमें कान सटाय के तऽ कखनहु कोना आ कखनहु कोना... बस अपन मुँह खोलती तऽ केकरा लग... संगी, साथी आ माय-बहिन - हिनके सभ लग अपन किछु विचार प्रकट करैत छथि। बाकी, हिनकर चुप्पी बहुत मार्मिक आ सभ्यताके चाप आ वजन सऽ चापल रहैत छन्हि। यदि ओ अपन विचार खूलिके राखैत छथि तऽ सर-ओ-समाज एक सय उलहन देतन्हि। बेटी चुप छथि मोटामोटी। संसारमें बेटी सभ आब कोनो प्रकार सऽ पाछां नहि छथि, मुदा मिथिलाके बेटी एखनहु अपन सभ्यताके बंधनमें बान्हल छथि। माय-बाप-परिजन एसगरे हिनक भविष्यके लेल व्यग्र छथि। बेटी चाहितो किछु बाजि नहि रहल छथि। जे बजली, हुनका लोकके नजरिमें खसय पड़ैछ। लोक सौ किसिम के हुनका विषयमें अफवाह फैलाबैछ। हलांकि आब किछु प्रतिशत परिवर्तन माँ मैथिलीके भूमि मिथिलामें सेहो देखबा में आबय लागल छैक... लगैछ जे बहुत दिनके दबल ज्वालामूखी फूटय लागल अछि। जे बेटी के इ ज्ञान छन्हि जे जीवन हुनक थिकन्हि आ कोनो निर्णयमें प्रथम अधिकार माता-पिताके समर्पित करितो हुनकर व्यक्तिगत सोच आ सुझाव शामिल रहबाक जरुरी छैक, ओ सभ अपन माता-पिता-परिजन संग खूलिके व्यवहार करैय लागल छथि। एतय तक कि बहुत पढल-लिखल परिवार बेटीके एतेक स्वतन्त्रता देबय लागल छथि जे बेटीके भावना सर्वोपरि, बेटी अपन कैरियर निर्माण के लेल मेहनत करैत आब गामो सऽ बाहर होस्टल आ शहरके अन्यान्य भागमें रहैत अपन जीवनके लेल लड़ाई करैत अपना संग-संग पारिवारिक मान-मर्यादाके रक्षा करैत आगू बढय लगलीह, तखन अपन जीवनसंगीके चुनावमें हुनक अधिकार प्रथम रहबाक चाही। देखू! बाहर सऽ देखलापर इ बात बहुत खींचतान होइत बुझैत छैक। लेकिन वास्तविकता यैह छैक, सभ परिवारमें एहने स्थिति छैक। समूचा मिथिला आब केवल आ केवल एक विन्दुपर अत्यन्त पाछू पड़ि रहल अछि ओ इ जे दहेज प्रथा के दबाव आ घर-वरके चुनाव अत्यन्त जटिल भऽ गेल छैक। पहिले इ निर्णय करय में सहज छलैक - कारण नौकरी के किसिम अधिकांशतः सरकारी छलैक आ बेशक सरकारी नौकरीवाला लड़का के माँग होइत छलैक। तहिना व्यवसायी वा कृषि क्षेत्रमें जेकर उच्च ओहदेदार छवि छलैक ओकरो किछु माँग होइत छलैक। तदोपरान्त लोक अपन चुनाव एहेन वर-घरके करैत छल जाहिमें एक-दोसरके क्षमता आ सामान्य माँगके पूरा करैके औकात आदि विन्दु बनैत छलैक सहायक निर्णय करय में। आब कनेक समस्या छैक। आब, बेटीके शिक्षा आ बेटाके शिक्षामें एक तऽ बहुत अन्तर नहि छैक - दोसर आब लड़काके योग्यता अनुसार विभिन्न प्रकार के नौकरी जाहिमें सरकारी कम आ निजी क्षेत्रमें बेसी रोजगार छैक। जमीन-जथा सेहो आब पहिले जेकां लोक लग नहि छैक। यदि छहियो तऽ ओकर उत्पानशीलतामें ओ दम नहि जे पहिलुका समय में होइत छलैक। तदापि खींचतान रहितो व्यवस्थामें एखन धरि कोनो उद्वेलन छैक से अधिकांशतः नहि छैक। हाँ, उद्वेलन जतय छैक ओतय समाजिक बंधनके तोड़ैत विभिन्न प्रकार के विवाह सभ होवय लागल छैक।
बेटाके लेल वधु के चुनाव सेहो एक मुख्य समस्या छैक आब... लेकिन दहेज के लोभ मनुष्यके विवेकहीन बनबैत छैक। तहू में जे आजुक अर्थ-प्रधान युग छैक, आब न्युनतम व्यवहारके निर्वाह करैक लेल सेहो लाख टाका के जोगार तऽ चाहबे करी। तखन समग्र रूप सऽ देखल जाय तऽ समस्याके निदान जटिल पहाड़ समान ठाड़्ह छैक। एक विद्वान् कहलखिन जे यदि बेटाके सभ संस्कार लोक अपनहि लगानी सँग सम्पन्न करैत छथि, तखन वैवाहिक संस्कार बेर में बेटीवाला पर बेसी भार देवाक कि कारण? कि बेटावाला ताहिमें सक्षम नहि छथि?? छथि। मुदा हुनका ऊपर तऽ बेटीवालाके मजबूरी आ दहेज के लोभ - इ दुनू विन्दु सहायक बनैत इ आश दैत छन्हि जे चल ने भाइ... कियो तऽ एबे करता आ फलां के विवाह सेहो नीके जगह पर हेतैक। लेकिन आब औसतन लड़का सभके उम्र ३० वर्ष भऽ गेलैक अछि - संभवतः केओ कुटुम्ब एथिन आ विवाह के प्रस्ताव देथिन आ एहि बेरका लगन में ओकर विवाह भऽ जेतैक। प्राइवेटमें लड़का एकाउन्टेन्ट अछि, आइटी प्रोफेशनल अछि... नीक दहेज सेहो भेट जेतैक। औसतमें ५ लाख के माँग बनबे करतैक। ;) त्याग के भावना मुश्किल सऽ ५% परिवार में रहैछ। लेकिन आखिर बेटावाला के सेहो बेटी छैक ने... तखन यदि बेटामें पाइ नहि लेथिन तऽ बेटीके विवाहमें कोना के पाइ देथिन...! इत्यादि द्वंद्व सभ जगह छैक। आब??
सर्वविदिते अछि जे आइ-काल्हि बेटीके जन्म सऽ पहिने शान्त करैक लेल सेहो अनेक उपाय आबि गेल छैक आ जनसंख्यामें असंतुलन एकर सभ सऽ पैघ प्रमाण थिकैक। यौ जी! बेटीके जन्म देबय सऽ पहिले यदि योजना सेट भऽ जेतैक तखन आगू माय के बनथिन? डेराउ नहि! बेटीके जन्म लेबय दियौक। सभ अपन भाग्य सऽ अबैत छैक एहि पृथ्वीपर। जेना विश्वंभर जन्म लेबय सऽ पहिने मायके स्तनमें जन्म लेबयवाला बच्चालेल पोषण के इन्तजाम कय दैत छथिन, तहिना आगुओ हुनकहि सनातन सिद्धान्त कार्यरत हेतैक।
चिन्ता कथीके स्वयं ओ पुरारी,
लाचार देखता पठौता सवारी!
लेता खबरि ओ सुनैत देरिया.... :)
आ, दहेज के पैसा कोन काजक?? देखियौ ने! कतेको उदाहरण तऽ सामने अछि। कतेक गोटाके दहेज के पैसा फबैत छन्हि से!! ;) सभटा तऽ जैछ बाजार के दोकान में!! पाइ लेलियैक तऽ आब सोनाके व्यवहार, इ आडंबर, ओ आडंबर... अनेक बात। सभमें शुद्धके समयके महंगाईके मार!! सोलह आनामें सऽ चारि आना तऽ फोकटमें उड़ल। एम्हर बरियाती जेतैक तऽ एकहि रंग के स्कोर्पियो गाड़ी के लाइन जरुर लगबाक चाही। लड़काके दोस्त सब शहर सऽ एतैक तऽ दारू-पानी आ बैण्ड बाजावाला ओ पंजाबी धून पर खूब ढोल पीटतैक तखन ने छौड़ा सभ डांड़्ह लचकायत। घोघटमें कम-दामी साड़ी कोना देबैक! लड़की के कर-कुटुम्ब सभके लेल केहनो कपड़ा देबैक तऽ सेहो नहि हेतैक... ! हरिः ॐ! कतय सऽ पाइ बचत? सभटा गेल बनियां के दोकान में।
परिवर्तन के लेल क्रान्ति - क्रान्ति के लेल बेटी सभ द्वारा कड़ा फैसला - बेटा के द्वारा त्यागके उदाहरण बनौनाइ - आडंबर के समाप्त केनै - समाजमें एक नियम बनेनै जे आब फलां समाजमें दहेज के व्यवहार प्रतिबन्धित अछि। लोक नहि सिर्फ ताहि ठाम अपन सम्बन्ध बनाबैक लेल लालायित हेता बल्कि ओहेन गामके - समाजके खूब नाम आयत। आदर्श समाजके निर्माण लेल दहेज के स्वस्फूर्त विरोध जरुरी। कोनो दाकियानुसी सोच नहि आब!! समस्याके हल्लूक बूझब मूर्खता।
शनिवार, 26 मार्च 2011
दहेज़ प्रथा रोकबाक लेल विचार करत बिहार - सरकार...
इ समाचार सुईंन के जतेक हम खुश भेलो, शायद अहूँ ओतबे खुश होयब...
आय मुंबई में एक समाचार पत्र (यशोभूमि) में एक खबर पढ्लो जाहीं सँ हमरा इ महसूस भेल जे "दहेज़ मुक्त मिथिला" के पुकार बिहार - सरकार सुईंन लेलक...
बिहार सरकार आय स्वीकार केलक कि दहेज़ प्रथाक बुराई के समाप्त करबाक लेल मौजूदा उपाय के अलावा जिलाधिकारी आर पुलिस अधीक्षक के व्यापक अधिकार देबाक लेल विचार करब जरुरी अछि, किए कि अदालत में एहेंन मामला के निपटाबै में बहुत बेसी समय लागैत अछि ! समाज कल्याण मंत्री परवीन अमानुल्लाह प्रश्नोत्तर काल में विधान परिषद में कहलखिन जे बिहार में दहेज़ प्रथा रोकबाक लेल कानून लागू अछि आर अलग - अलग जिला में ओई ठामक जिला कल्याण पदाधिकारी दहेज़ निषेध अधिकारीक रूप में काज के रहल छैथ आर महिला विकास निगम के प्रबंध निदेशक के राज्य में पनपल दहेज़ निषेध अधिकारीक रूप में नियुक्त करल गेल अछि!
समाज कल्याण मंत्री परवीन अमानुल्लाह कहलखिन जे दहेज़ कुप्रथा के रोकबाक लेल राज्य सरकार बहुत कार्यक्रम चले रहल छैथ आ लोग सभ के जागरूक करबाक प्रयास करल जे रहल अछि.....
गुरुवार, 17 मार्च 2011
सौराठ सभा कि छी ?? - प्रवीण चौधरी
मैथिल विवाहके सभा छी - जाहिठाम लाखोंके संख्यामें वरागत एवं कन्यागत सभक जुटान होइत छल, आब एहिमें एकदम नगण्य सहभागिता भऽ रहल अछि... एहि जुटानमें पंजिकार सभके माध्यमसँ जोड़ी-मिलान एवं विवाह कार्यक्रमके निश्चित कैल जैत अछि।
एहि में सहभागी सभके कमी कियैक?
पहिले घर-कुटमैतीके माध्यमसँ घटकैती कम एवं सभाके माध्यमसँ बेसी होइत छल, लाखों वर-कन्यापक्षके भीड़ भेलाक कारण पंजिकार द्वारा अपन-रुचि-अनुसार वर-कन्याके जोड़ी मिलान होइत छल। क्रमशः जेना-जेना मिथिलाके लोकमें आर्थिक समृद्धि आयल तहिना-तहिना घर-कुटमैतीके संख्या बढय लागल... पहिले जतय हजारमें ब्यवस्था भऽ जाइत छल ताहिठाम क्रमशः लाखमें बात होवय लागल, जाहि कारण प्रत्येक वरागत पक्षमें लोभके प्रविष्टि भेल एवं एहि तरहें लोक सभागाछी कम आ घर-कुटमैतीके माध्यमसँ बेसी पाइ के लोभमें इ प्रथा में कमी आयल। सभागाछीमें एक कूरीतिके सेहो प्रवेश भेल - पंजिकार द्वारा एवं अन्य बिचौलियाके द्वारा ठकविद्या सेहो प्रवेश करैत लोकके विश्वासमें कमी आनैत गेल एवं एहि तरहें धीरे-धीरे तथाकथित नीक लोक सभके सहभागिता सेहो कम भेल। सरकारी उपेक्षा सेहो एक प्रमुख कारण भेल!
सभागाछी के फेर आवश्यकता किऐक?
आइ जखन मैथिल सभ मात्र अपन पूर्वजके भूमिटापर नहि बास करैत भारत एवं विश्वके अनेक कोनमें पहुँचि गेलाह अछि... कतेक गोटे तऽ सालमें एक बेर गाम अबैत छथि, कतेक गोटे तऽ पाँच साल आ कतेक गोटे तऽ १०-२०-२५ साल सऽ बाहरे छथि... तखन हिनक धिया-पुताके गाममें या मिथिलाके लड़की-लड़का कोना भेटत, ताहि हेतु एक केन्द्र जाहि ठाम निश्चित समयपर फेर पहिले जेकाँ भीड़ लागय एहि हेतु सभा गाछीके आवश्यकता अपरिहार्य बुझैछ।
सभागाछीके आधुनिकता कोना?
आइ कंप्युटरके युग छैक। पंजीकरणके कंप्युटर द्वारा डेटा-प्रोसेसिंग होयबाक चाही एवं सुटेबल मैचके निर्णय सेहो कंप्युटर मैचिंग/सर्चिंग अप्शन आदि द्वारा वेबसाइटके मार्फत उपलब्ध होइक, एवं समयपर हुनका लोकनिक समुचित साक्षात्कार हेतु सभा लगबाक चाही। एहि तरहें बेसी सँ बेसी सहभागिता सेहो होयत आ ठकविद्या आदि सेहो नहि चलत, लोक सभ एक दोसरके बारेमें कंप्युटर द्वारा पहिले सऽ जे जानकारी जुटायत से तऽ हेवे करतै आ सभामें आबि ओकरा प्रत्यक्ष आरो विकल्प सभ भेटतैक।
सामूहिक विवाह आदिके विकल्प सेहो खुलतैक।
सभ जाति हेतु इन्तजाम होयबाक जरुरी छैक।
सरकार द्वारा सेहो एहि प्रथाके प्रोत्साहन भेटतैक।
गरीबी रेखासँ नीचा हेतु सरकारके संग अन्य निजी दान एवं सहयोगके सेहो गुंजाइश बढतैक।
एहि प्रकारें - सम्बन्धित अनेक बात भऽ सकैछ जाहिपर हमर ध्यान नहि पहुँचल होयत, अपने लोकनि सेहो नीक विन्दुपर आरो प्रकाश दऽ सकैत छी... दहेज आदि के सेहो स्वतः विरोध होइ, आदर्श कुटमैती होयत... अपने लोकनि अपन-अपन विचार राखू।
जय मैथिली! जय मिथिला!!
अपनेक विचार पढबाक आश में - प्रवीण चौधरी ‘किशोर’
बुधवार, 16 मार्च 2011
संपूर्ण मिथिलावासी सँ हमर अपील!
संपूर्ण मिथिलावासीकेँ सूचित करैत अपार हर्ष भऽ रहल अछि जे आगामी २० जुन सँ २९ जुन २०११ धरि सौराठससौलासभा के मुहुर्त अछि। हलाँकि विगत किछु सालमें एहि सभाके समर्थन मूल्य में नहि सिर्फ ह्रास आयल बल्कि लगभग इ महत्त्वपूर्ण प्रथा लगभग लोपोन्मुख भऽ गेल अछि। जखन कि मैथिलवैवाहिकसभाके रूपमें प्रख्यात एहि सभाके मूल्य किनकहु सँ छुपल अछि से बात नहि। जेना-जेना हमरा लोकनि झूठ आ आडंबरमें फंसैत गेलहुँ, तहिना-तहिना मैथिली एवं मिथिलाके सर्वमान्य सिद्धान्त सभके छोड़ैत गेलहुँ। अतः समग्र मैथिल समाजसँ आग्रह जे एहि सभाके पुनर्जीवित करैक लेल, एकर गरिमाके पुनरुत्थान करैक लेल फेर सँ सभ केओ एकजूट भऽ के सभाके सफल आयोजन हेतु बेसी सँ बेसी संख्यामें सहभागी बनी।
एहि अभियानके जोर-शोरसँ प्रचार करय हेतु हमर निवेदन जे अपने जाहि गाम-शहर-बाजारमें जतेक मैथिल होइ, ताहि ठाम समुचित विज्ञापन एवं जन-जागरण के माध्यमसँ सभसँ सम्पर्क करैत हुनका लोकनिकेँ सौराठ सभामें उचित सहभागिता हेतु निवेदन करी।
जय मैथिली! जय मिथिला!!
अपनेक विचार पढबाक आश में - प्रवीण चौधरी ‘किशोर’
शुक्रवार, 11 मार्च 2011
रस्ता के रोड़ा.. (इ कोई कहानी नहीं अछि!)

सोमवार, 7 मार्च 2011
कारण बताऊ -------की सम्भब्भ अछि जे दहेज़ प्रथा के अपना समाज से उठायल जा सकैत अछि ?
कारण बताऊ -------
अहि प्रथा के अन्तोगातावा कोनाक हेताय ? जे आगू के जिनगी में जिबैय के कारण बन्तैय
अपन बिचार किछ अहं द सकैत छि ? ----
बहुत बुजुर्ग सब गेलैथी और छैथि ,जे कतेको सस्त आ महाग जिनगी देखलखिन अनुभाभ केलैथि , आ बहुत रास अपन कीर्ति सेहो क गेलायथी, की हुनकर ई जरुरत नै छालें जे अहू के ख़तम का दिय , की हुनक सबके निक लागैत अछि जे आगू के पीढ़ी में हमर बल - बच्चा के की हेतयक , आ नव युबक के त जबाब नै जे , की देखता आ की करता अपन जिनगी में ,
किछ अहै बात पर उलेखय अछि जे से जानू ------
१ . लोग कहैत अछि जे , नव्युबक अगर प्रेम वियाह पर जोर देथिन त ई समस्या के किछ निदान हेतैय
२ . अगर प्रेम वियाह पर धयान देल जय त अहि से मिथिलांचल के संस्कृत पर आंच नै अबैत अछि , जकर कारण अछि जाती प्रथा , एगो वर्ण दोसर वर्ण में वियाह नै क सकैत अछि , ई मिथिला के प्रधानता अछि , अगर प्रेम प्रधानता पर बिचार करी त ई उछित नै , प्रेम जैत और सकल नै देखैत अछि प्रेम अछि त नाम और जैत नै ,
३. अगर दहेज नै लैत छि त हम सब लोग से मजबूर बनल छी ,कारण जे आई के जुग में सब अपन पद प्रतिस्ठा के लेल जीबैत अछि ,
४ . दहेज़ आर्थिक अबस्था पर सेहो प्रभाब करैत अछि , यदि जीतू जी के लग धन्सम्पति अपार छैन , ओ फाला जा के ओहिठाम केना कुटमैती करता , हुनका लग भोजन करैक ले सही बैबस्था नै छैन , ओहीठाम एक दोसर के समाबेस भेनाई बहुत कठिन लागैत अछि , एकर बराबरी होयत दहेज़ से , जे हिनका लग एतेक ओकात छैन ,
४ . एकर जिमेबार के अछि ? हम की अहाँ या कियो और ?
उतर भेटल जे सब कियो --- से केना ? अहाँ बताऊ
आउ! दहेज उन्मूलन योजना बनाउ...
"हम मानव जीवनके धारमें सभ मानवके अपनहि समान बुझि प्राकृतिक न्यायसँ भरल व्यवहार करब।"
एहि शपथकेर मूल अर्थ एतबे छैक जे हम अपना लेल जे दोसरसँ अपेक्षा रखैत छी, हमहुँ दोसर प्रति तहिना श्रद्धा-भावपूर्ण व्यवहार करब।
१. यदि हम अपन बेटी हेतु नीक घर-वर तकैत छी, आ पैसा-वस्तु-दहेज देबयके लेल तत्पर छी, अवश्य हम दोसरोसँ अपेक्षा राखब जे हमरो बेटा बेरमें सूदि सहित असूलब। ;) मुदा कि प्राकृतिक न्याय भेलैक एहिठाम?
हमर विचारसँ - जरुरी नहि छैक जे हम जेहि श्रेणीमें छी, ताहि श्रेणीक दोसर परिवार कोनो वैज्ञानिक तराजूपर, वेभसाइटपर, धरातलपर, सौराठ सभामें... या कोनाहु तुरन्त भेटि जाय - विरले एहेन जोड़ी बनैछ - वर-कन्याके जोड़ी जे सभ प्रकारसँ अकाट्य होइ, समधि-समधिनके सम्पन्नता एवं व्यवहारिक ज्ञानमें समानता, भाषा-धर्ममें समानता, संस्कारमें समानता, आदि अनेक बात छैक जे लोक अपन समान दोसरमें तकैत छै कुटमैतीके समय में। तऽ पहिल विन्दुपर देखल जाय तऽ इ कहनाइ असम्भव छैक जे अपने दहेज दैक लेल सक्षम छी तऽ लेबयके लेल सेहो तत्पर रहू तऽ न्याय होयत, एकदम अन्याय हेतैक। यदि अपने सहीमें मानव छी, मानवताक धर्म सर्वोपरि मानैत छी, प्राकृतिक न्यायमें विश्वास अहि तऽ एहि भ्रांतिके दूर करू। जतेक अपनेक क्षमता अहि, ताहि प्रकारसँ बेटीके विदाई करी, एवं तहिना बेटाक समयमें समधिक पक्षकेँ, स्वायत्तताकेँ, स्वेच्छाकेँ सम्मान करियौन; नहि कि माँग रखियौन, दबाव बनबियौन... वर-कन्याक आत्मा कोना एक अर्ध-नारीश्वर शिव बनत ताहिपर मात्र विचार करियौक। एहि चेतनाकेँ सदा अपनाउ आ एकरा सम्बर्धन करियौक।
एहि प्रकारसँ - हम अपने लोकनिसँ आग्रह करैत छी जे विभिन्न शर्त-हालतकेर सिरियल नंबर दैत लिखी, अपन विचार दी एवं उपलब्ध सभ सदस्यसँ विचार ली। सामाजिक चेतनाक जागृति हेतु नाटक मंचन करी, नुक्कड़ नाटक बहुत प्रभावकारी होयत। यदि अपने लोकनि एकर १० मिनट मात्र गाम-गाम, नगर-शहर, गली-कुची प्रदर्शन करब तऽ एकदम प्रभावकारी होयत।
अपनेक विचार पढबाक आश में - प्रवीण चौधरी ‘किशोर’
शुक्रवार, 4 मार्च 2011
दहेज़ मुक्त मिथिलाक उद्येश,....
मिथिलाक नाम पर बहुत आन्दोलन चैल रहल अछि!
मुदा की मिथिला में दहेज़ प्रथाक लेल कुनू आन्दोलन चलत ?? यो मैथिल बंधूगन कहिया ई दहेजक महा जालसँ मिथिला मुक्त हेत... ??
मंगलवार, 1 मार्च 2011
दहेज़??? We 'Maithil' don't support it!
PS: I have written this post considering the current trends being followed in the Mithila Community, and I don't intend to hurt anyone's sentiments in any manner. Feedback and participation are always welcome. Thank you!!



