सुचना: प्रिय मैथिल बंधूगन, किछ मैथिल बंधू द्वारा सोसिअल नेटवर्क (फेसबुक) पर एक चर्चा उठाओल गेल " यो मैथिल बंधूगन कहिया ई दहेजक महा जालसँ मिथिला मुक्त हेत ?" जकरा मैथिल बंधुगणक बहुत प्रतिसाद मिलल! तहीं सँ प्रेरीत भs कs आय इ जालवृतक निर्माण कएल गेल अछि! सभ मैथिल बंधू सँ अनुरोध अछि, जे इ जालवृत में जोर - शोर सँ भागली, आ सभ मिल सपथ ली जे बिना इ प्रथा के भगेना हम सभ दम नै लेब! जय मैथिली, जय मिथिला,जय मिथिलांचल!
नोट: यो मैथिल बंधुगन आओ सभ मिल एहि मंच पर चर्चा करी जे इ महाजाल सँ मिथिला कोना मुक्त हेत! जागु मैथिल जागु.. अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर प्रकट करू! संगे हम सभ मैथिल नवयुवक आ नवयुवती सँ अनुरोध करब, जे अहि सबहक प्रयास एहि आन्दोलन के सफलता प्रदान करत! ताहीं लेल अपने सभ सबसँ आगा आओ आ अपन - अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर राखू....
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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

सभा गाछी आब नइए रहत बीरान - विकाश झा

सभा गाछी आब नइए रहत बीरान !
एकसय जोरिक इ बनत मचान !

फेसबुक पर आई कईएल मचल घमासान,
दहेज़ मुक्त मिथिला अछी बनल दालान !

कलंकी दहेज़ के करू भसान ,
मिथिलाक धिया ने देती आब जान !

बुढ़बा जुअनका अछी सबहक रुझान ,
घरे- घरे चर्चा आ चौक पर ठेकान !

जागू यौ मैथिल आब करू मिलान ,
सौराठे मैं हैत आब एकर निदान !

अर्थ दीयौ, बेर दीयौ करू इ आन ,
पाछु ने हटब आ चलायब अभियान !

प्रवीण,प्रकाश आ राजूक अगुआन ,
बिकासक सनेह करैत बिकासे बखान !

सनेहक संग...
विकाश झा

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सोमवार, 21 मार्च 2011

बेटी के दहेज़ के भार (अभय दीपराज )

बेटी के दहेज़ के भार..........

बनल असह्य संताप समाजक, बेटी के दहेज़ के भार !
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार !!

जे बेटी जननी समाज के, मूल प्रेम - स्नेह के !
अपमानक हम पातक लेत छी, ओहि बेटी के देह के !
अपन मान सँ हम अविवेकी, अपने कयलौं दुर्व्यवहार !
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार !!१!!

बड़ ज्ञानी, बड़ शिष्टाचारी, मानव बनि हम जन्म लेलौं !
नीति - न्याय के परिभाषा हम कयलौं, बड़ सद्कर्म केलों !!
सब यश पर भारी ई अपयश, संतानक कयलौं व्यापार !
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार !!२

जेहि बेटी में दुर्गा - कमला और सीता के वास अहि !
ओ बेटी अपना नैहर पर बोझ बनल, उपहास अहि !
एहन पातकी - पापी छी हम, हाँ, एहि पातक पर धिक्कार !
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार !!३!!

बेटी के अपमानक ई विष, उपटा देलक जों ई फूल !
हमर - अहाँ के, सबहक आँगन में नाचत विनाश के शूल !!
संकट ई गंभीर भेल अब, करिऔ एहि पर तुरत विचार !
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार !!४!!

आइ अगर ई व्यथा हमर अछि, काल्हि अहाँ के ई अभिशाप !
एक - एक कय पेरि रहल अछि, सबके एहि ज्वाला के दाप !!
सबहक गर्दन, शान्ति और सुख, काटि रहल अछि ई तलवार !
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार !!५!!

बनल असह्य संताप समाजक, बेटी के दहेज़ के भार !
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार !!
रचनाकार- अभय दीपराज

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मंगलवार, 15 मार्च 2011

आदर्श विवाह - प्रभात राय भट्ट..

हम छी मिथिलाक ललना,
दहेज़ ला क बनब नए बेल्गोब्ना,
दहेज़ लेनाए छई अपराध,
कियो करू नए एहन काज,
हम करब विवाह आदर्श,
अहू लिय इ सुन्दर परामर्श,
भेटत सुन्दर शुशील कनिया,
आहा स प्रेम खूब करती सजनिया,
आँगन में रुनझुन रुनझुन,
बाजत हुनक पैजनिया ,
घर केर बनौती सुन्दर संसार,
भेटत बाबु माए केर सेवा सत्कार,
छोट सब में लुटवती वो दुलार,
अहक भेटत निश्छल प्रेमक प्यार,
जौ दहेज़ लयक विवाह करबा भैया,
कनिया भेटत कारिख पोतल करिया,
हुकुम चलैतह शान देखैतह,
बात बात में करतह गोर्धरिया,
अपने सुततह पलंग तोरा सुतैत पैरथारिया,
बात बात में नखरा देखैतह,
भानस भात तोरे सा करैतह,
अपने खेतह मिट माछ खुवा मिठाई,
जौं किछ बाजब देतः तोरा ठेंगा देखाई,
रुईस फुइल नहिरा चईल जेताह,
साल भैर में घुईर घर एतः
सूद में एकटा सूत गोद में देतः
पुछला स कहती इ थिक अहाक निशानी,
आब कहू यौ दहेजुवा दूल्हा,
आहा छी कतेक अज्ञानी ???
तेय हम दैतछी यी सुन्दर परामर्श,
सुन्दर शुशील भद्र कनिया भेटत,
विवाह करू आदर्श,विवाह करू आदर्श!!!

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शुक्रवार, 11 मार्च 2011

कुमारी धिया - प्रभात राय भट्ट..

सुनु सुनु यौ मिथिलावासी आऔर मिथिलाक बाबु भैया !!
संगी सखी सभक भेलई ब्याह, हमर होतई कहिया !!
तिस वरखक भेली हम, मुदा अखनो रहिगेली कुमारी धिया !!
हमरा लेल नए छाई संसार में, एक चुटकी सिंदुरक किया !!
रोज रोज हम सपना देखैत छि, डोली कहार ल्या क ऐलैथ पिया !!
आईख खुलैय सपना टूटईय, जोर जोर स: फटईय हमर हीया !!
गामे गाम हमर बाबा घुमैय,ल्याक हाथ में माथक पगरी !!
कतहु वर नए भेटैय,की विन पुरुख के छई यी मिथिला नगरी ?!!
बेट्टावाला केर चाहि पाँच दश लाख टाका आ गाड़ी सफारी !!
तिनचाईर लाख टाका ऊपरस:जौ चाहैछी जे ओझा करे नोकरी सरकारी !!
अन्न धन्न गहना गुरिया एतेक चाही जे भईरजाई हुनक भखारी !!
बेट्टीवाला दहेज़ में सबकुछ लुटा क अपने भजाईत अछि भिखारी !!
बाबा हमर खेत खलिहान बेच देलन आ बेच रहल छैथ अपन घरारी !!
अहि कहू यौ मिथिलावासी आऔर मिथिलाक बाबु भैया !!
कतय स:देथिन बाबा हमर दहेज़ में एतेक रुपैया !!
रचनाकार: प्रभात राय भट्ट

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बालविबाह - प्रभात राय भट्ट

आहा जे नई भेटतौ त जिनगी रहित हमर उदास !!
सागर पास होइतो में बुझैत नई हमर मोनक प्यास !!
अहि स पूरा भेल हमर जिनगी केर सबटा आस !!
नजैर में रखु की करेजा में राखु अहि छि हमर भगवान !!
उज्जरल पुज्जरल हमर जिनगी में आहा एलौ !!
रंग विरंग क ख़ुशी केर फूल खिलेलौं !!
की हम भेलू अहाक प्रेम पुजारी ,अहा हमर भगवान यौ !!
मुर्झायल फूल छलौ हम ,अहि स खिलल हमर प्रेमक बगिया !!
बालविधवा हम अबोध छलौ ,समाज केर पैरक धुल !!
उठैलौ अहा हमरा करेजा स लगैलौ, बैनगेली हम फूल !!
पतझर छलौ भेल हम,सिच सिच क अहा लौटेलौ हरियाली !!
अनाथ अबला नारी के अपनैलौ आ बनेलौ अपन घरवाली
अहि स यी हमर जिनगी बनल सुन्दर सफल सलोना !!
गोद में हमर सूरज खेलैय,अहा बनलौ बौआक खेलौना !!
हमर उज्जरल पुज्जरल जिनगी में अहा येलौ !!
रंग विरंग क ख़ुशी केर फूल खिलेलौ,ख़ुशी स हमर आँचल भरलौं !!
हमर मन उपवन में अहि बास करैत छि, अहि केर हम पूजित छि !!

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गीत बालविबाह - प्रभात राय भट्ट

हम नए ब्याह करब यौ बाबा वालीउमरिया में !!
पढ़ लिख खेल कूद दिय,हमरा अपन संग्तुरिया में !!
निक घर वर भेटल छौ,दहेज सेहो कमे मंगैछौ !!
आगुम की हेतै से नए मालूम,ब्याह करहीटा परतौ !!
ब्याह करहीटा परतौ गे बेट्टी..............
हम चौदह वरखक कन्याकुमारी अहाक राजदुलारी !!
मुदा दूल्हा छैथ विदुर आ पाकल हुनक केस दाढ़ी !!
हम नए ब्याह करब यौ बाबा वालिउमरिया में २ !!
दूल्हा विदुर भेलई तईस: की धन सम्पति अपार छई !!
भेटतौ नए कतौ एहन घर वर दूल्हा सेहो रोजगार छई !!
रुईक जाऊ रुईक जाऊ बाबा यौ हमरा पैघ होब दिय !!
पैढ़लिख क हमरो कोनो सरकारी नोकरी करदिय !!
बेट्टावाला अहाक दरवाजा पर अओता !!
कहता अहाक बेट्टी स:हम अपन बेट्टा क ब्याह करब !!
अहा कहब नै नै अखन हम बेट्टी क ब्याह नए करब !!
फुइक फुइक क चाय पीयब ,अहू किछ शान धरब !!
हम नए ब्याह करब यौ बाबा वालिउमरिया में !!
एक लाख टका के बात कहले तू भगेले सयान गे !!
बेट्टी क भविष्य नए सोचलौ,हमही छलौ नादान गे !!
बेट्टी क ब्याह कोना हयात सतौने छल हमरा दहेज़ क डर !!
बाल विबाह करबई छलौ,खोईज लेलौ बुढ्बा वर !!
नए ब्याह करबौ गे बेट्टी तोहर वालिउमरिया में !!
पढ़ लिख खेलकूद तू अपन संगतुरिया में !!

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शनिवार, 5 मार्च 2011

हम साँच बजैत छी....

हुजूर !
हम साँच साँच बजैत छी
साँच छोड़ी किछ नहि बजैत छी
हम दहेज़ नहि लैत छी .
राति दिन समाज सुधार में व्यस्त
रहैत छी
खाइत छी, पिवैत छी
मस्त रहैत छी
हुजूर ,हम दहेज़ नहि लैत छी.
की बाजलों
बड़का बौआ क व्याह में ?
नै नै जी नै
गलत बुझल अछ अहांके
स्थिति जानल नहि अहांके
टी वी देख बिन चैन नहि
फ्रिज क पानि बिन चैन नहि
से जज साहब !
अपन बेटी के ओ देलन्हि
हुजूर, हम ते नहि लेलहुं
हमरा सन गरीब ओते फ्रिज कत
टी वी कत
बस एकटा बेटा अछि
आला आफिसर
की कहलों गहना जेवर ?
ठीक बाजलों हुजूर
गहना से लादि देलक बाप ओकर
बाजल
अहाँ किछ नहि बाजु
रंग में भंग नहि घोरु
ई स्त्री-धन थीक
हमर बेटीक जीवन थीक
जखन सासुर में दुःख भेटत
जेवर जात स सुख भेटत
सोनाक खान में रहत
चैन क निन्न सूतत
हुजूर हमर की दोष अछि
की बेटी वाला निर्दोष अछि ?
की बाजलों ,छोटका बौआ ?
बेरोजगार ,निर्धन अछ
बस एकटा नौकरीक प्रश्न अछ ...
कोनो कोलेज में डोनेशन द
प्रोफेसरी दिआय दिय
आ की लाख लाख टका दय
सरकारी नौकरी लगाय दिय
बांचल अपन सुख साधन क सामान
ओ स्वयं ल क अओतीह
बेटी अहींक सुख पओतिह
हमर की
हमर ते किस्मत जेहन अछ ओहने
रही जायत.....................

लेखिका : डॉ. शेफालिका वर्मा

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हमहूँ मिथिला के बेटी थिकाऊ ?

भोरे   सूती उठी देखलो
आँखी सं अपन  नोर पोछैत ,
माए पुछलक कियाक कनैत  छी  ?
की देखलो  स्वप्न में कुनू दोस ?
बेटी आँखिक  नोर  पोछैत --की माए
हमहूँ  मिथिला  के  बेटी  थिकाऊ  ?

जतय  सीता जन्मली  मैट सं
ओहो  एकटा  नारी  भेली ,
जिनका रचायल वियाह स्वम्बर
हमहूँ  ओहिना एगो  नारी  भेलौ 
बेटी आँखिक  नोर  पोछैत --की माए
हमहूँ  मिथिला  के  बेटी  थिकाऊ  ?

आय  देखैत छीक घर - घर में
दहेजक  कारन  कतेक घरसे बहार ,
उमर  वियाहक  बितैत  अछि  हमरो --
की करू  हमहूँ  अपन  उपचार  ?
बेटी आँखिक  नोर  पोछैत --की माए
हमहूँ  मिथिला  के  बेटी  थिकाऊ  ?

धिया - पुत्ता में कनियाँ - पुतरा  संग
अपन  जिनगी  के केलो  बेकार ,
बाबु - काका  लगनक आश  में
सालक - साल लागोलैन जोगार ,
बेटी आँखिक  नोर पोछैत --की माए
हमहूँ  मिथिला  के  बेटी  थिकाऊ  ?

वियाह  देखलो संगी - सहेली क
नयन  जुरयल  मन  में  आस   भेटल ,
बट सावित्री    मधुश्रवणी पूजितो
सेहो आई सपनोहूँ से  छुटल
बेटी आँखिक  नोर पोछैत --की माए
हमहूँ  मिथिला  के  बेटी  थिकाऊ  ?

लेखिका -  
सोनी कुमारी (नॉएडा )
पट्टीटोल , भैरव  स्थान ,
झंझारपुर , मधुबनी , बिहार

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