सुचना: प्रिय मैथिल बंधूगन, किछ मैथिल बंधू द्वारा सोसिअल नेटवर्क (फेसबुक) पर एक चर्चा उठाओल गेल " यो मैथिल बंधूगन कहिया ई दहेजक महा जालसँ मिथिला मुक्त हेत ?" जकरा मैथिल बंधुगणक बहुत प्रतिसाद मिलल! तहीं सँ प्रेरीत भs कs आय इ जालवृतक निर्माण कएल गेल अछि! सभ मैथिल बंधू सँ अनुरोध अछि, जे इ जालवृत में जोर - शोर सँ भागली, आ सभ मिल सपथ ली जे बिना इ प्रथा के भगेना हम सभ दम नै लेब! जय मैथिली, जय मिथिला,जय मिथिलांचल!
नोट: यो मैथिल बंधुगन आओ सभ मिल एहि मंच पर चर्चा करी जे इ महाजाल सँ मिथिला कोना मुक्त हेत! जागु मैथिल जागु.. अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर प्रकट करू! संगे हम सभ मैथिल नवयुवक आ नवयुवती सँ अनुरोध करब, जे अहि सबहक प्रयास एहि आन्दोलन के सफलता प्रदान करत! ताहीं लेल अपने सभ सबसँ आगा आओ आ अपन - अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर राखू....

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सँ विभिन्न नगरके -- कार्यकर्ता


दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सँ विभिन्न नगरके जे चार्ज बहुतो जुड़ल सदस्य सभ लेने रही से अपन-अपन नेतृत्वमें किछु-किछु कार्यक्रम घोषणा करै जाइ। एहि सँ सभके संस्थाके वर्तमान प्रगति, सौराठके सफल आयोजन, पंजियन लेल बाकी काज, वर्तमान उद्देश्य आ आगामी दिल्ली कार्यक्रम एहि प्रमुख विन्दुपर सभके जानकारी सेहो दऽ देबैन आ संगहि सभके नैतिक जागरण करैत एहि... मूहिममें जुड़य लेल आग्रह करबनि। हम स्मरण कराबय लेल चाहब:

१. सोनु मिश्रा, पटना (आइ के दिनमें अहाँके कृष्णानन्दजी सेहो सहयोग करताह।)

२. राजु ठाकुर, मद्रास

३. अमित झा, बंगलौर

४. विकास झा, जमशेदपुर

५. अरविन्द झा, कलकत्ता (राघवेन्द्रजी सेहो सहयोग करताह।)

६. अभिषेक आनन्द, दिल्ली (राघवेन्द्रजी, संतोषजी, विभिन्न मित्र सभ सेहो सहयोग करताह।)

७. मदन ठाकुर,  नोएडा 

८. पंकज भाइ, मुंबई (जितमोहनजी आ संदीपजी सेहो सहयोग करताह - ओनाहू अहाँ पहिले सऽ निर्णय केनहिये छी जे कार्यक्रम करबैक।)

९. राकेश रौशन, वाराणसी (सहयोग के आकांक्षा रहलापर आरो कार्यकर्ता देल जा सकैत अछि।)

१०. चन्दन झा, रायपुर

११. प्रकाश भाइ, मधुबनी

१२. प्रवीण चौधरी, बिराटनगर (एवं अन्य - यथासंभव)

१३. पवन झा, जनकपुर

१४. देवेन्द्र मिश्र, राजबिराज

१५. धीरेन्द्र भाइजी, काठमाण्डु संग अन्यत्र

१६. अजित भाइजी, लेखक बीच एवं अन्यत्र

१७. कुञ्जबिहारी मिश्रजी, अपन प्रत्येक कार्यक्रम में

१८. सियाराम झा सरस, अपन कार्यक्रम में

१९. डा. देवेन्द्र झा, अपन कार्यक्रम में

२०. सत्यानन्द पाठक, गुवाहाटी

२१. संजय घोष, सिलिगुड़ी एवं भूटान

एतेक सदस्य एवं गणमान्य लोकनि जाहिमें बहुत गोटे स्वयं जिम्मेवारी लेने छी से हमरा स्मरण अछि - यदि किनको कोनो प्रकारके असुविधा होय तऽ जानकारी दी जाहि सँ वैकल्पिक व्यवस्था देखल जाय। किछु सदस्यके नाम हम बिसैर गेल होइ तऽ अपनहि जानकारी देब। संगहि बहुतो महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व सभ संग एखन सम्पर्कके सिलसिला चलिये रहल अछि। समय-समय पर जानकारी दैत रहब। सभ गोटे मिलिके यथार्थके धरातलपर दहेज मुक्त मिथिलाके अभियानके जोर-शोर सऽ चलाबी से आग्रह।

योजनानुसार मिथिलाके हर गाम में हमरा लोकनिक प्रवेश आ संगठन निर्माण सेहो छल जे पंजियन में देरी के कारण लटकल अछि। पंडित विश्वमोहन चन्द्र मिश्रजीके अध्यक्षतामें एक पंजिकार भ्रमण टोलीके गठन के बात सेहो छल जाहि लेल दिल्लीके कार्यक्रम उपरान्त आवश्यक पहल होइक से जानकारी देबय चाहब।

अपने लोकनि सँ आग्रहजे अपन विचार सेहो निरंतर दैत रहियौक।

जय मैथिली! जय मिथिला!!
हरिः ह!!

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बुधवार, 13 जुलाई 2011

दहेज़ के विरोध

 
मिथिला स दहेज़ हटाबू
 मिथिलानी के जान बचाबू
 हम सब करब मिथिला के फेर निर्माण
जाही में युवक करत अपन कल्याण
भेटत ओहने फेर सम्मान
... जीवन के छी जोर अनेक
 ओही में दहेज़ अछी राक्षस एक
एकरा मरू जूता चारी
दहेज नै फोरत फेर कपारी
जगु युवक करू मिथिला के सम्मान
नहीं त भात्काब एहिना आन थम
चालू एक बेर रंग देखाबू
मिथला महँ अछी एकरा अपन
बुद्रुक बुदृकिया के समझबू
जय  मिथिला जय  हिंद
आनंद झा

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शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

एक पत्र मिथिलाके विद्वान्‌के नाम



आदरणीय शिवनाथ सर,------

        बहुत प्रसन्नता भेटल अपनेक फेशबुक पड़का प्रोफाइल देखि के!! अपनेक पुस्तक के माध्यम से आन्दोलनके बात पढला सऽ आरो जिज्ञासा जागल कि देखी एहेन महान्‌ शख्स जिनक आत्मविश्वास एतेक सार्थक कि पुस्तक सऽ आन्दोलन के बात करैत छथि... माँ सरस्वतीके कृपा अपने ऊपर बनल रहैन आ अपने अपन सोच आ अन्दाज दुनूमें कामयाब होइ इ प्रार्थना।
संगहि, हमरा लोकनि किछु युवा हालहि किछु मास पहिने सँ फेशबुकके पेजपर सऽ एक अति प्राचिन परंपरा जे आइ-काल्हि एकदम वीभत्स रूपमें मिथिला समाजके दीमक जेकां चटने जा रहल छैक - मिथिलामें सेहो आब सीताके जन्म लेबय सऽ पहिने ओहि धरामें दबाओल जा रहल छैक जेकर प्रभाव सऽ जनसंख्या २०११ प्रमाण स्वरूप कहि रहल अछि जे स्त्रीके संख्यामें घटाव भऽ रहल अछि। एकर प्रभाव एतबी हमरा अहाँ पर हावी अछि जे लोक अपन बेटीके पढाबैक इच्छा रखितो ओकर पढाई पर खर्च कम आ ओकरा नामके बैंक बैलेन्स बेसी बनाबैत छथि जाहि सँ विवाह कोनो नीक घरमें कराओल जा सकैक...! कतेक अनैतिक बात छैक - देखू, किछु गार्जियन बेटा आ बेटीमें कोनो फर्क बिना केने नीक सऽ नीक खर्च करैत बेटीके सेहो उच्चाधिकारी तक बनाबैत छथि, मुदा आब हिनक बेटीके लायक एक तऽ लड़का के कमी, दोसर जे यदि कोनो लड़का उच्चाधिकारी लड़की लायक भेटबो केलखिन तऽ आब ओहि त्यागी बापके लेल जे केओ जमाय बनथिन ओ व्यवस्थामें कतेक दहेज गनबेथिन आ ओ व्यवस्थाके कतय सऽ ओ बाप चुकेथिन... :(... तखन आब कि हेतैक... मजबूरीमें ओ उच्च शिक्षित बेटी अपन चुनाव स्वयं करती आ मिथिलाके बाहरो के लड़का बेसी संभव चुनि सकैत छथि जे पुनः मिथिलाके गरिमा के लेल एक चुनौती ठाड़्ह करत। हलांकि सीताजी सेहो राम संग वरण केलीह, लेकिन आबके सीता कतय ठहरती, मिथिलाके सम्मान सीताजी तऽ एहेन बना देलीह जे हमरा लोकनि गर्व करैत छी कि हुनकहि धरतीपर जन्म भेल... मुदा आजुक सीता तऽ शहर के मुँह देखिते देरी मैथिली तक बिसरि जैत छथि... कतेक दुःखद स्थिति छैक सर? सर! हमरा लोकनि आब केवल पुरनका सम्मानके भजा रहल छी, नव में हमर सभके अबस्था एहेन दरिद्री सऽ भरल रहत... कि इ नीक बात? सोची! अपने लोकनि एहि समाज के अग्रगामी निकास देनिहार व्यक्तित्व सभ थिकहुँ। यदि नहि किछु करब तऽ दोषी बनब। सभ संग किनारा कैल जा सकैछ, मुदा अपन आत्माके ज्ञान सदिखन हमरा लोकनिके कोसत।
सर! आब एहेन समय आबि गेलैक जे अपने लोकनि मिथिलाके राम मनोहर राय बनि एहि दहेजके दानव जे ताण्डव कय रहल अछि एकरा भगाउ आ ओ सुन्दर सौराठके परिकल्पना के पुनः जीवित करू। सौराठ एक नहि अनेक होइक आ मैथिल पुनः अपन गरिमाके रक्षार्थ एक बेर क्रान्ति के बिगूल बजाबैथ। हमर आग्रह!
दिल्लीमें एक कार्यक्रम रखने छी, २८ सेप्टेम्बर के! अपने दहेज मुक्त मिथिला नामक ग्रुप पर यदि नहि होइ तऽ आबी आ किछु समय हमरो लोकनिके पथ-प्रदर्शन करी, सेहो आग्रह!
अपनेक शुभेच्छूक,
प्रवीण चौधरी
कार्यकर्ता, दहेज मुक्त मिथिला
हरिः एव हरः!!

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मंगलवार, 5 जुलाई 2011

दिल्ली चलू! दिल्ली चलू!!

२८ सेप्टेम्बर, २०११ - नवरात्राके पहिल दिन - एक एहेन जयन्ती पारब जाहि सँ समस्त मैथिली-मिथिलाके कार्यरत संस्था जिनक उद्देश्य भाषा, संस्कृति एवं समग्र मिथिला भूमि के कल्याण हेतु छन्हि - सभके एक प्लेटफार्मपर जोड़ैत एक एहेन अपूर्व कार्यक्रम दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सँ आयोजन कैल जाय जाहि के माध्यम सँ आब २१वीं शताब्दीमे...ं बेटा आ बेटी एकसमान छथि आ जन्म सँ पहिले कन्या-भ्रूण-हत्याके घोर विरोध स्वरूप दहेजरूपी दानवके अपन परिष्कृत समाजसँ दूर भगाबय लेल एकजूट आह्वान करब - जेकर संवाद नहि सिर्फ मिथिला बल्कि समस्त भारत, नेपाल, भूटान संग विश्व समुदायमें शंखध्वनि जेतैक आ लोकलज्जाके रक्षा करैत बहुतो मिथिलाके संतान एवं समग्र जनमानसमें एहि कुप्रथाके अन्त करैक स्फूरणा जगतैक।

स्थान के निर्धारण अबैवाला समयमें - जुलाई के आखिरी तक करब।

कार्यक्रमके प्रारूप:

१. मिथिला झांकी प्रदर्शनी - नगर परिक्रमा संग शुरु करैत मैथिली वा मिथिला संग जुड़ल दिल्लीमें जे कोनो प्रतीकात्मक चिह्न अछि ताहि ठाम वा एक विद्यापति के मूर्ति अनावरण करैक योजना ऊपर सेहो निर्णय करैत हुनकहि प्रतिमाके माल्यार्पण करैत कार्यक्रमके उद्‍घोष-उद्‍घाटन करब। चूँकि दिल्लीमें विद्यापतिक एहेन कोनो प्रतिमा पहिले सँ स्थापित अछि वा नहि से हमरा जानकारी नहि अछि, ताहिलेल अपने लोकनि जे दिल्ली सँ छी से एहि विन्दुपर मन्थन करैत निर्णय करी से आग्रह।

२. मिथिला खानपान स्टॅल के उद्‍घाटन जाहिठाम मिथिलाके विशिष्ट परिकार - व्यञ्जन आदिके खूबसूरत प्रदर्शनी संग सहभागी समस्त मिथिलावासीके लेल एक विशेष उत्सवके अवसर। एहिलेल खानपान सामग्रीके प्रबन्ध सेहो कोनो मैथिल द्वारा होइक चाही। एहेन स्टॅलमें आयोजक द्वारा न्यूनतम सामग्री प्रायोजित होइक आ तेकर बाद व्यवसायिक दृष्टिकोण सँ सहभागिताके संभावित संख्याके अनुसार निजी व्यवसायीके ठेका देल जाय।

३. बाल-बालिकाके कला प्रस्तुति - बाल्य नाटक, नृत्य, चित्रकला (मिथिला पेन्टिंग), मिथिलालिपि लिखनिहार बच्चाके प्रोत्साहन आ एहेन अनेक विन्दु जे केवल आ केवल बच्चा सभमें मैथिलीप्रति झुकावके बरकरार राखैक।

४. विचार गोष्ठी - विद्वान्‌ विचारक, समाज सेवी, नेतृत्वकर्ता, मिथिला आइकान, प्रवासी मिथिलावासी एवं अन्य के समूचा भारत-नेपाल एवं संभव होय तऽ अन्य देश सँ सेहो सहभागी बनबैत दहेज एवं किछु अन्य महत्त्वपूर्ण मुद्दा जाहिमें मिथिलामें पर्यटनके विकास - मिथिलावासी स्वयं नव-मिथिलाके निर्माणकर्ता आदि राखल जाय।

५. सांस्कृतिक कार्यक्रम - नृत्य, संगीत, नाटक, आदि। समूचा दिल्लीके कलाकार जे मैथिली संग जुड़ल छथि आ तदोपरान्त आवश्यकता अनुसार बाहर सऽ कलाकार के सहभागिता कराओल जाय।

६. दिल्ली सम्मेलनके सारांश - दिल्ली उद्‍घोषणा पत्र के प्रकाशन आ कार्यक्रम समापन।

उपरोक्त प्रारूप ऊपर अपन टिप्पणी आ सुधारके लेल सुझाव लेल प्रार्थना।

प्रार्थी - प्रवीण

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एक नज़र सौराठ सभा...

सौराठ : एक परिचय एवम इतिहास

ग्यरह्नवी सदी मे जखन महोम्मद गजनी गुजरात के सोमनथ मन्दिर पर आक्रमन केल ओकरा लुटाइ ला ता ओतुक पन्डित जी सब जे कि मैथिल ब्राह्मण छेला ओ शिवलिन्ग के ला का भगला और ओकर ला का मधुबनी जिला ऎला और जे जगह ओकर स्थपित केला ओकरा सौराठ कहल जाइ छै कारन सोमनाथ सौराष्ट् मे अबै छै ।


किदवन्ति

किछ विद्वान के मानई छैथ जे कि अगर इ बात सच रहितै तखन बाद मे गुजरती सब ऎकर लाइ के प्रयास किया नै केला और ता और सौरठ के ओ सब अप्प्न धार्मिक स्थल नाइ मानला ।


मिथिला मे सभा गाछी के महत्व

अठारह्वी सदी के सुरु होइत देरी मुगल सब के प्रभाव खत्म भेनाइ सुरु भा गेल । मैथिल ब्राह्मण जे कि पिछ्ला किछ दिन स पतन देखला ओ सोचला जे कि किया नाइ इ जगह पर एक टा सभा काल जा , चुन्कि ओ सभा गाछी मे भेल तई दुआरे ओकरा सौराठ सभा गाछी कहल जाइ छै । ओइ मे मैथिल ब्राह्मण मे स विद्वान सब बैसै छेला और

शास्त्रर्थ करै छेला ।



सौराठ मे विवाह

पहिले के समय मे मैथिल ब्राह्मण मे लड्र्की के विवाह १७ स २० वर्ष मे करई के प्राब्धन रहाइ । सह दुआरे मैथिल सब सोचला कि इ मन्च के विवाह के मन्च के रुप मे सुरु काल जा ।


विवाह के तरीका

सौराठ मे लाड्र्का और लड्र्की के विवाह होइ छेलाइ लेकिन मैथिल परमपरा के रुप मे विवाह के चर्चा लड्र्का और लड्र्की के परिवार के बर बुजुर्ग करई छेला । बाद मे सौराठ मे कर्ण क्यास्थ के विवाह सेहो हेबा

लागल लेकिन फ़ेर ओ हेनाइ हाइट गेल और सिर्फ़ ब्राह्मण सब के विवाह हेबा लागल ।


सौराठ के पतन

सौराठ मे सुरु मे नीक एवम सुयोग्य लड्र्क और लड्र्की के विवाह होइ छेला लेकिन फ़ेर ओता दिक्कत अबा लागल । ओइ ठम बुड वर सब के विवाह हेबा लागल जे कि सबस बरका दिक्कत छै । अई सन्ग सन्ग ओता लुल्ह और लान्गर सब के विवाह सेहो हेबा लागल । ऎहेन विवाह बेसी नाइ टिकै छैल तै दुआरे सौराठ सभा गाछी विवाह के महात्वता खत्म भ गेल |

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मिथिला दहेज मुक्त कोना होयत ?

सामान्यतया घरमें जखन बेटी १८ वर्षके उम्र सँ गुजरि जैछ वा ताहू सऽ बेसी (यदा-कदा कमो...) होवय लगैछ तऽ एक अत्यन्त यथार्थ सोच सभके मस्तिष्क में आबय लगैछ जे आब बेटीके लेल योग्य घर ओ वरके चुनाव करैत कन्यादान करबाक अछि। तहु सऽ पहिने घरमें बेटीके माय बेटीके पिताके खखोरय लगैत छथिन जे हे आबो यदि कतहु बुच्चीलेल सुयोग्...य वरके नहि खोजब तऽ कहिया खोजब... आ एहि प्रकारें शुरु होइछ तकैया। कुटुम्ब आ सम्बन्धीके संग होवय लगैछ वार्तालाप जे कनेक बुचिया लेल कोनो घर-वर देखबैक। ताही क्रममें कोनो योग्य घर-वरके सुझाव आदि सेहो भेटैछ आ चलय लगैछ माथा-पच्ची।

एक बात करू अहाँ गौर यदि,
घरके छथि बनल बोझ बेटी??

प्रकृतिके विडंबना नहि तऽ कि,
पराया घरके लेल बनली बेटी!! :(

खैर - विडंबना सही, लेकिन भार अवश्य बेटी बनैछ अपन जन्म देनिहारि माय-बाप-परिजन पर - अन्य भार नहियो तऽ एतबी जे कोन घर-वर भेटत हिनका लेल। केना के व्यवस्था गानब, केना कि हेतैक, कतेक खर्च करब, केहेन लड़का चाही, अनेको प्रश्न उठैछ हिनक मस्तिष्क में। उद्वेलित हृदय माय-बाप के लेल कोन सहायता बेटी कय सकैत छथि आखिर? ओहो कसमकस में अपन जीवन संगीके लेल सपना देखैत गुमशुम अपन माय-बाप-परिजनके हुनका सदाके लेल पराया बनबैक योजना बनबैत कखनहु नुका के तऽ कखन देवालमें कान सटाय के तऽ कखनहु कोना आ कखनहु कोना... बस अपन मुँह खोलती तऽ केकरा लग... संगी, साथी आ माय-बहिन - हिनके सभ लग अपन किछु विचार प्रकट करैत छथि। बाकी, हिनकर चुप्पी बहुत मार्मिक आ सभ्यताके चाप आ वजन सऽ चापल रहैत छन्हि। यदि ओ अपन विचार खूलिके राखैत छथि तऽ सर-ओ-समाज एक सय उलहन देतन्हि। बेटी चुप छथि मोटामोटी। संसारमें बेटी सभ आब कोनो प्रकार सऽ पाछां नहि छथि, मुदा मिथिलाके बेटी एखनहु अपन सभ्यताके बंधनमें बान्हल छथि। माय-बाप-परिजन एसगरे हिनक भविष्यके लेल व्यग्र छथि। बेटी चाहितो किछु बाजि नहि रहल छथि। जे बजली, हुनका लोकके नजरिमें खसय पड़ैछ। लोक सौ किसिम के हुनका विषयमें अफवाह फैलाबैछ। हलांकि आब किछु प्रतिशत परिवर्तन माँ मैथिलीके भूमि मिथिलामें सेहो देखबा में आबय लागल छैक... लगैछ जे बहुत दिनके दबल ज्वालामूखी फूटय लागल अछि। जे बेटी के इ ज्ञान छन्हि जे जीवन हुनक थिकन्हि आ कोनो निर्णयमें प्रथम अधिकार माता-पिताके समर्पित करितो हुनकर व्यक्तिगत सोच आ सुझाव शामिल रहबाक जरुरी छैक, ओ सभ अपन माता-पिता-परिजन संग खूलिके व्यवहार करैय लागल छथि। एतय तक कि बहुत पढल-लिखल परिवार बेटीके एतेक स्वतन्त्रता देबय लागल छथि जे बेटीके भावना सर्वोपरि, बेटी अपन कैरियर निर्माण के लेल मेहनत करैत आब गामो सऽ बाहर होस्टल आ शहरके अन्यान्य भागमें रहैत अपन जीवनके लेल लड़ाई करैत अपना संग-संग पारिवारिक मान-मर्यादाके रक्षा करैत आगू बढय लगलीह, तखन अपन जीवनसंगीके चुनावमें हुनक अधिकार प्रथम रहबाक चाही। देखू! बाहर सऽ देखलापर इ बात बहुत खींचतान होइत बुझैत छैक। लेकिन वास्तविकता यैह छैक, सभ परिवारमें एहने स्थिति छैक। समूचा मिथिला आब केवल आ केवल एक विन्दुपर अत्यन्त पाछू पड़ि रहल अछि ओ इ जे दहेज प्रथा के दबाव आ घर-वरके चुनाव अत्यन्त जटिल भऽ गेल छैक। पहिले इ निर्णय करय में सहज छलैक - कारण नौकरी के किसिम अधिकांशतः सरकारी छलैक आ बेशक सरकारी नौकरीवाला लड़का के माँग होइत छलैक। तहिना व्यवसायी वा कृषि क्षेत्रमें जेकर उच्च ओहदेदार छवि छलैक ओकरो किछु माँग होइत छलैक। तदोपरान्त लोक अपन चुनाव एहेन वर-घरके करैत छल जाहिमें एक-दोसरके क्षमता आ सामान्य माँगके पूरा करैके औकात आदि विन्दु बनैत छलैक सहायक निर्णय करय में। आब कनेक समस्या छैक। आब, बेटीके शिक्षा आ बेटाके शिक्षामें एक तऽ बहुत अन्तर नहि छैक - दोसर आब लड़काके योग्यता अनुसार विभिन्न प्रकार के नौकरी जाहिमें सरकारी कम आ निजी क्षेत्रमें बेसी रोजगार छैक। जमीन-जथा सेहो आब पहिले जेकां लोक लग नहि छैक। यदि छहियो तऽ ओकर उत्पानशीलतामें ओ दम नहि जे पहिलुका समय में होइत छलैक। तदापि खींचतान रहितो व्यवस्थामें एखन धरि कोनो उद्वेलन छैक से अधिकांशतः नहि छैक। हाँ, उद्वेलन जतय छैक ओतय समाजिक बंधनके तोड़ैत विभिन्न प्रकार के विवाह सभ होवय लागल छैक।

बेटाके लेल वधु के चुनाव सेहो एक मुख्य समस्या छैक आब... लेकिन दहेज के लोभ मनुष्यके विवेकहीन बनबैत छैक। तहू में जे आजुक अर्थ-प्रधान युग छैक, आब न्युनतम व्यवहारके निर्वाह करैक लेल सेहो लाख टाका के जोगार तऽ चाहबे करी। तखन समग्र रूप सऽ देखल जाय तऽ समस्याके निदान जटिल पहाड़ समान ठाड़्ह छैक। एक विद्वान्‌ कहलखिन जे यदि बेटाके सभ संस्कार लोक अपनहि लगानी सँग सम्पन्न करैत छथि, तखन वैवाहिक संस्कार बेर में बेटीवाला पर बेसी भार देवाक कि कारण? कि बेटावाला ताहिमें सक्षम नहि छथि?? छथि। मुदा हुनका ऊपर तऽ बेटीवालाके मजबूरी आ दहेज के लोभ - इ दुनू विन्दु सहायक बनैत इ आश दैत छन्हि जे चल ने भाइ... कियो तऽ एबे करता आ फलां के विवाह सेहो नीके जगह पर हेतैक। लेकिन आब औसतन लड़का सभके उम्र ३० वर्ष भऽ गेलैक अछि - संभवतः केओ कुटुम्ब एथिन आ विवाह के प्रस्ताव देथिन आ एहि बेरका लगन में ओकर विवाह भऽ जेतैक। प्राइवेटमें लड़का एकाउन्टेन्ट अछि, आइटी प्रोफेशनल अछि... नीक दहेज सेहो भेट जेतैक। औसतमें ५ लाख के माँग बनबे करतैक। ;) त्याग के भावना मुश्किल सऽ ५‍% परिवार में रहैछ। लेकिन आखिर बेटावाला के सेहो बेटी छैक ने... तखन यदि बेटामें पाइ नहि लेथिन तऽ बेटीके विवाहमें कोना के पाइ देथिन...! इत्यादि द्वंद्व सभ जगह छैक। आब??

सर्वविदिते अछि जे आइ-काल्हि बेटीके जन्म सऽ पहिने शान्त करैक लेल सेहो अनेक उपाय आबि गेल छैक आ जनसंख्यामें असंतुलन एकर सभ सऽ पैघ प्रमाण थिकैक। यौ जी! बेटीके जन्म देबय सऽ पहिले यदि योजना सेट भऽ जेतैक तखन आगू माय के बनथिन? डेराउ नहि! बेटीके जन्म लेबय दियौक। सभ अपन भाग्य सऽ अबैत छैक एहि पृथ्वीपर। जेना विश्वंभर जन्म लेबय सऽ पहिने मायके स्तनमें जन्म लेबयवाला बच्चालेल पोषण के इन्तजाम कय दैत छथिन, तहिना आगुओ हुनकहि सनातन सिद्धान्त कार्यरत हेतैक।

चिन्ता कथीके स्वयं ओ पुरारी,
लाचार देखता पठौता सवारी!
लेता खबरि ओ सुनैत देरिया.... :)

आ, दहेज के पैसा कोन काजक?? देखियौ ने! कतेको उदाहरण तऽ सामने अछि। कतेक गोटाके दहेज के पैसा फबैत छन्हि से!! ;) सभटा तऽ जैछ बाजार के दोकान में!! पाइ लेलियैक तऽ आब सोनाके व्यवहार, इ आडंबर, ओ आडंबर... अनेक बात। सभमें शुद्धके समयके महंगाईके मार!! सोलह आनामें सऽ चारि आना तऽ फोकटमें उड़ल। एम्हर बरियाती जेतैक तऽ एकहि रंग के स्कोर्पियो गाड़ी के लाइन जरुर लगबाक चाही। लड़काके दोस्त सब शहर सऽ एतैक तऽ दारू-पानी आ बैण्ड बाजावाला ओ पंजाबी धून पर खूब ढोल पीटतैक तखन ने छौड़ा सभ डांड़्ह लचकायत। घोघटमें कम-दामी साड़ी कोना देबैक! लड़की के कर-कुटुम्ब सभके लेल केहनो कपड़ा देबैक तऽ सेहो नहि हेतैक... ! हरिः ॐ! कतय सऽ पाइ बचत? सभटा गेल बनियां के दोकान में।

परिवर्तन के लेल क्रान्ति - क्रान्ति के लेल बेटी सभ द्वारा कड़ा फैसला - बेटा के द्वारा त्यागके उदाहरण बनौनाइ - आडंबर के समाप्त केनै - समाजमें एक नियम बनेनै जे आब फलां समाजमें दहेज के व्यवहार प्रतिबन्धित अछि। लोक नहि सिर्फ ताहि ठाम अपन सम्बन्ध बनाबैक लेल लालायित हेता बल्कि ओहेन गामके - समाजके खूब नाम आयत। आदर्श समाजके निर्माण लेल दहेज के स्वस्फूर्त विरोध जरुरी। कोनो दाकियानुसी सोच नहि आब!! समस्याके हल्लूक बूझब मूर्खता।

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दहेज मुक्त मिथिलाके भविष्य - प्रवीण चौधरी..

बंधुगण! इ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विन्दु अछि जाहि पर दहेज मुक्त मिथिलाके वर्तमान सदस्यके संगहि अन्य महानुभाव सभ सेहो विचार करी। जाबत धरि निम्न विन्दु ऊपर संस्थाके वर्तमान अबस्था अहाँ सभ के स्पष्ट नहि होयत, एकर भविष्य निर्धारण करब बहुत मुश्किल बुझा रहल अछि।

१. कार्यकर्ता: एखन धरि के अबस्था एहेन अछि जे हमरा लोकनि... छिटफूट किछु प्रतिबद्ध लोक एहिमें अपन समय, धन आ विचार लगा रहल छी। कोनो समय यदि १० कार्यकर्ता एक ठाम बैसयके योजना बनायब आ किछु आगामी समयके लेल विचार करब से संभव नहि अछि, अनेको कारण सऽ।

२. केन्द्र: यथार्थके धरातलपर एकर केन्द्र पंजी भवन, सौराठ सभागाछी अछि - मुदा फेशबुकपर एकर केन्द्र इ ग्रुप याने दहेज मुक्त मिथिला अछि। यथार्थके केन्द्रपर केवल दू-चारि गोटे तत्पर छथि - हुनको तत्परता में एतेक मर्म छन्हि जे हम मने मन हुनका सभके बेर-बेर प्रणाम करैत छी। हमर हार्दिक इच्छा अछि जे केन्द्रके कार्यालयके व्यवस्थित करैक लेल एक कंप्युटर के परम आवश्यकता छैक आ श्री प्रकाश चौधरीजीके अध्यक्षतामें एहि कार्यालयके सुचारू रूप सऽ कार्यान्वयन कैल जयबाक चाही। हलाँकि प्रकाश भाइ आइ तीन महीना सऽ अपन अमूल्य योगदान देलाह छथि, अपन जे एक छोट-छिन फोटोग्राफीके दोकान छलन्हि सेहो बन्द भऽ गेलन्हि अछि, बहुत समस्याके भीतरे-भीतर पिबैतो ओ दहेज मुक्त मिथिलाके लेल अपन अमूल्य योगदान देलाह, एकर आभार हमरा लोकनि कहियो नहि उतारि सकब। लेकिन आगामी समयके लेल हिनकर समयके समुचित ढंग सऽ लैक लेल संस्थाके प्रतिबद्ध संचालक सदस्य सभ एक बान्हल योगदान यदि देथिन तखनहि संभव छैक जे कार्यालय निरंतर चलतैक - फेशबुकके केन्द्र सऽ यथार्थके केन्द्रके बीच सामंजस्य रहतैक आ सरकारी कोष संग जुड़ैके सेहो प्रयास हेतैक। गाम-गाम एहि बात के चर्चा पहुँचतैक। हरेक सप्ताह नव-नव गामके जोड़ल जेतैक। एहि सभ के लेल एक समुचित कोष के आधार कि तऽ?

३. कोष: यैह प्रमुख विन्दु थीक। शुरु कैल, सदस्यता शुल्क मात्र कोषके आधार बनाओल। तदोपरान्त किछु सक्षम सदस्य अपन व्यक्तिगत अनुदान राशि सऽ एहि संस्थाके मजबूती देबाक चेष्टा करैत रहलाह छथि। आगुओ हिनकहि तैयार रहय पड़तन्हि... ताबत, जाबत इ संस्था एक गैर सरकारी संगठन बनिके नहि सामने अबैछ आ एकर कारोबार सरकारी योजनानुसार नहि चलय लगैछ। एहि में कम से कम ६ महीना के समय मानल जाउ। पहिले पंजियन, फेर कम से कम ४०-५० गाम में संस्थाके सदस्यताके निर्माण। तदोपरान्त एक आमसभा - फेर कार्यक्रम योजना, कोषके व्यवस्थापन, कार्यान्वयन, आदि अनेक तत्त्वपर विचार करैत प्रोजेक्ट पेश केनै आ सरकारी योजनाके अन्तर्गत समाजमें जागृति पसारयके काज के संग-संग दहेज मुक्त मिथिलाके अपन जे किछु योजना हेतैक से सभ शुरु कैल जेतैक। सभ मिला के यदि एखन १० सदस्य ५००/- महीना के अनुदान उपलब्ध करौता, तखनहि संभावना प्रबल बनैछ जे संस्थाके प्राणाधार बनल रहतैक। आब एहेन १० सदस्य के तऽ??

४. कार्यक्रम योजना: शुरुमें हमरा लोकनिक योजना एहेन छल जे फेशबुक के पेज सऽ १०० लड़का दहेज मुक्त विवाह करनिहार एता - अनेरौ सऽ समूचा मिथिलामें इ खबर इजोत जेकाँ पसरतैक आ ताहि क्रममें संगठन स्वतः लोकके विश्वास जितैत बनतैक... लेकिन... अपने लोकनि जनैत छी जे एहेन किछु नहि भेलैक। गप मारऽ के अलावा ओहि विन्दुपर कोनो उल्लेखणीय कार्य प्रतिबद्ध सदस्य द्वारा नहि कैल गेल। दोष केकरो नहि, समय के फेरी कहल जाय। पुनः हम सभ प्रतिबद्ध छी जे अगिला साल तक कम से कम १०० दहेज मुक्त विवाह अवश्य कराओल जाय। बहुत लगन सऽ हम सभ लागल छी, बहुत लोक हमरा संग सेहो सम्पर्क में आयल छथि आ उम्मीद अछि जे ईश्वर-कृपा सऽ इ योजना अगिला साल तक सफल होइ। मुदा एकर सफलता तखनहि हेतैक जखन हम सभ छोट-छोट कार्यक्रम अनेको जगह करबा सकी। जेना हम गछने छी जे दिसम्बरमें बिराटनगरमें सौराठके प्रतिकात्मक पुनरावृत्ति करेबैक आ जागृति करैत आह्वान करबैक जे दहेज मुक्त विवाह करनिहार हमरा सभ संग जुड़ैथ आ सौराठ एहेन महत्त्वपूर्ण पारंपरिक संस्था सभके मिलि-जुलिके सम्हारै जाउ। एहि तर्जपर दिल्ली, पटना, कलकत्ता, मुंबई, वापि, चेन्नै, बंगलोर, रायपुर, आदि दूरस्थ जगह के संग-संग मिथिलाके अनेको क्षेत्रमें कार्यक्रम करबैत एक आम आह्वान करबैक आ इ काज प्रत्येक महीना होइक से योजना छैक। यदि पंजियन प्रक्रिया भऽ जेतैक तखन जल्दिये कला-संस्कृति विभाग द्वारा सेहो पूर्ण सहयोग भेटतैक, इ आशा अछि।

५. क्रियान्वयन: उपरोक्त बहुत विन्दुपर यदि दहेज मुक्त मिथिला सक्षम होइछ, तऽ क्रियान्वयन में समस्या नहि हेतैक इ उम्मीद राखै जाउ। यदि वास्तवमें लोक में दहेज प्रति विछोह छैक, आ सत्यके धरातल पर परिवर्तन चाहैत छथि, तऽ अपन उर्जा के संस्थाके उर्जामें समाहित करैत आगू बढैत रहबाक प्रतिबद्धता अवश्य जाहिर हेतैक आ सफलतापूर्वक सभ कार्यक्रम के क्रियान्वयन कैल जा सकैछ। एकर सुखद परिणाम इ हेतैक जे लोकमें विश्वास आ उम्मीद दुनू बढतैक - सब सऽ बेसी परिवर्तन एतैक हताश बेटी आ बहिनमें - कारण ओकर अबस्था जे एक मूक दर्शक के छैक ताहिमें बोली एवं हिम्मत आबैक पूर्ण संभावना छैक।

बंधुगण! उपरोक्त ५ महत्त्वपूर्ण विन्दुमें अपने लोकनि कतय आ केना योगदान दऽ सकैत छी से स्वयं निर्णय करू। दहेज मुक्त मिथिलाके भविष्य के निर्धारण अहीं सभके हाथ में अछि।

जय मैथिली! जय मिथिला!!

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