सुचना: प्रिय मैथिल बंधूगन, किछ मैथिल बंधू द्वारा सोसिअल नेटवर्क (फेसबुक) पर एक चर्चा उठाओल गेल " यो मैथिल बंधूगन कहिया ई दहेजक महा जालसँ मिथिला मुक्त हेत ?" जकरा मैथिल बंधुगणक बहुत प्रतिसाद मिलल! तहीं सँ प्रेरीत भs कs आय इ जालवृतक निर्माण कएल गेल अछि! सभ मैथिल बंधू सँ अनुरोध अछि, जे इ जालवृत में जोर - शोर सँ भागली, आ सभ मिल सपथ ली जे बिना इ प्रथा के भगेना हम सभ दम नै लेब! जय मैथिली, जय मिथिला,जय मिथिलांचल!
नोट: यो मैथिल बंधुगन आओ सभ मिल एहि मंच पर चर्चा करी जे इ महाजाल सँ मिथिला कोना मुक्त हेत! जागु मैथिल जागु.. अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर प्रकट करू! संगे हम सभ मैथिल नवयुवक आ नवयुवती सँ अनुरोध करब, जे अहि सबहक प्रयास एहि आन्दोलन के सफलता प्रदान करत! ताहीं लेल अपने सभ सबसँ आगा आओ आ अपन - अपन विचार - विमर्श एहि जालवृत पर राखू....

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

बालविबाह - प्रभात राय भट्ट

आहा जे नई भेटतौ त जिनगी रहित हमर उदास !!
सागर पास होइतो में बुझैत नई हमर मोनक प्यास !!
अहि स पूरा भेल हमर जिनगी केर सबटा आस !!
नजैर में रखु की करेजा में राखु अहि छि हमर भगवान !!
उज्जरल पुज्जरल हमर जिनगी में आहा एलौ !!
रंग विरंग क ख़ुशी केर फूल खिलेलौं !!
की हम भेलू अहाक प्रेम पुजारी ,अहा हमर भगवान यौ !!
मुर्झायल फूल छलौ हम ,अहि स खिलल हमर प्रेमक बगिया !!
बालविधवा हम अबोध छलौ ,समाज केर पैरक धुल !!
उठैलौ अहा हमरा करेजा स लगैलौ, बैनगेली हम फूल !!
पतझर छलौ भेल हम,सिच सिच क अहा लौटेलौ हरियाली !!
अनाथ अबला नारी के अपनैलौ आ बनेलौ अपन घरवाली
अहि स यी हमर जिनगी बनल सुन्दर सफल सलोना !!
गोद में हमर सूरज खेलैय,अहा बनलौ बौआक खेलौना !!
हमर उज्जरल पुज्जरल जिनगी में अहा येलौ !!
रंग विरंग क ख़ुशी केर फूल खिलेलौ,ख़ुशी स हमर आँचल भरलौं !!
हमर मन उपवन में अहि बास करैत छि, अहि केर हम पूजित छि !!

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